दिए गए काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं :
(I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है।
(II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है।
(III) श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है।
(IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।
विकल्प :
दिए गए काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं :
(I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है।
(II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है।
(III) श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है।
(IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।
विकल्प :
Options
Official answer
घ) (III) और (IV) सही हैं।
काव्यांश में मीरा की श्रीकृष्ण-सान्निध्य हेतु सेविका बनने की तत्परता (कथन III, "चाकर रहस्यूँ") तथा श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन (कथन IV, "मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला") - दोनों भाव स्पष्ट रूप से व्यक्त हुए हैं, जबकि भक्तवत्सल रूप (I) तथा सहायता की याचना (II) का काव्यांश में कोई उल्लेख नहीं है।
Marking scheme
- 1.1 अंक: सही विकल्प (घ) चुनने पर पूर्ण अंक।
- 2.आंशिक अंक की व्यवस्था नहीं - MCQ में या तो पूर्ण अंक या शून्य।
Hint
काव्यांश में दो मुख्य भाव खोजें - मीरा की सेविका बनने की इच्छा (सान्निध्य के लिए) और कृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन।
Quick oral answer
काव्यांश का मूल भाव यह है कि मीरा श्रीकृष्ण के सान्निध्य हेतु उनकी सेविका बनने को तैयार हैं और साथ ही काव्यांश में कृष्ण के रूप-सौंदर्य का भी वर्णन किया गया है।
Common mistakes
- 1.'भक्तवत्सल रूप' और 'सान्निध्य के लिए सेविका बनना' - इन दोनों भावों को एक समझ लेना, जबकि ये भिन्न हैं।
- 2.मीरा की प्रार्थना को 'सहायता माँगना' समझ लेना, जबकि यह वास्तव में सेवा और दर्शन की भक्तिपूर्ण याचना है।
Analysis and explanation
काव्यांश का मूल भाव दो प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है।
कथन (III) - सही
- मीरा श्रीकृष्ण के सान्निध्य और दर्शन-प्राप्ति के लिए उनकी सेविका/चाकर बनने को भी तैयार हैं - यह भाव 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी...चाकर रहस्यूँ' पंक्तियों से स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।
कथन (IV) - सही
- काव्यांश में श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का सजीव वर्णन भी किया गया है - 'मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला' पंक्ति में उनके मोरपंख मुकुट, पीताम्बर वस्त्र और वैजयंती माला का वर्णन है।
कथन (I) और (II) - गलत
- 'भक्तवत्सल रूप का वर्णन' गलत है क्योंकि काव्यांश में कृष्ण द्वारा भक्तों पर की गई कोई कृपा या दयालुता की घटना वर्णित नहीं है; यह केवल मीरा की ओर से समर्पण और कृष्ण के रूप-वर्णन तक सीमित है।
- 'सहायता करने का आग्रह' भी गलत है क्योंकि मीरा किसी संकट से उबारने की सहायता नहीं माँग रहीं, बल्कि सेवा और दर्शन की याचना कर रही हैं - यह भाव समर्पण और भक्ति-याचना का है, सहायता-याचना का नहीं।
निष्कर्ष
- अतः केवल (III) और (IV) ही काव्यांश के मूल भाव को सही रूप से व्यक्त करते हैं।
Interesting facts
मीराबाई के पदों में आत्म-निवेदन (सेविका भाव) और कृष्ण के सौंदर्य-वर्णन का संयोजन भक्ति-काव्य की एक विशिष्ट शैली मानी जाती है, जिसे 'माधुर्य भाव' और 'दास्य भाव' का सम्मिश्रण कहा जाता है।
'पीताम्बर' और 'वैजयंती माला' कृष्ण के पारंपरिक शृंगार-प्रतीक हैं, जो वैष्णव भक्ति-काव्य में बार-बार वर्णित होते हैं।
Question details
Q48 of 66 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course B
- Year
- 2026
- Section
- Section ग
- Marks
- 1
- Type
- MCQ
- Chapter
- अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
- Topic
- मीराबाई का भक्ति पद - मूल भाव का मूल्यांकन
- Bloom's level
- evaluate
- Syllabus topic
- खंड ग: अपठित बोध - काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न 9(v)
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
काव्यांश का मूल भाव क्या है?
काव्यांश का मूल भाव यह है कि मीरा श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए उनकी सेविका बनने को तैयार हैं, और साथ ही काव्यांश में कृष्ण के रूप-सौंदर्य का भी वर्णन किया गया है।