Q47
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श्रीकृष्ण की चाकरी में मीरा को जेब खर्च के रूप में क्या प्राप्त होगा ?

अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
मीराबाई का भक्ति पद - खरची के रूप में सुमरण

Options

()कृष्ण के दर्शन
()नाम-स्मरण
()भाव रूपी भक्ति
()वृंदावन में रहना
Official Answer

ख) नाम-स्मरण

"चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची" पंक्ति से स्पष्ट है कि चाकरी के बदले 'दर्शन' मुख्य प्रतिफल है, जबकि जेब-खर्च (खरची) के रूप में मीरा को 'सुमरण' अर्थात् नाम-स्मरण प्राप्त होगा।

खरचीसुमरणनाम-स्मरणजागीरभाव-भक्ति

Marking Scheme

  • 11 अंक: सही विकल्प (ख) चुनने पर पूर्ण अंक।
  • 2आंशिक अंक की व्यवस्था नहीं - MCQ में या तो पूर्ण अंक या शून्य।

Hint

'सुमरण पास्यूँ खरची' पंक्ति को ध्यान से पढ़ें - 'खरची' शब्द के ठीक पहले क्या आया है, वही उत्तर है।

Quick Oral Answer

मीरा को चाकरी में खरची (जेब-खर्च) के रूप में 'सुमरण' यानी नाम-स्मरण प्राप्त होगा, जबकि दर्शन और भाव-भक्ति अन्य दो प्रतिफल हैं।

Analysis & Explanation

काव्यांश की पंक्ति 'चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची' में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चाकरी के बदले मीरा को 'दर्शन' मिलेगा, परन्तु 'खरची' (जेब-खर्च) के रूप में उन्हें 'सुमरण' अर्थात् नाम-स्मरण प्राप्त होगा।


सही उत्तर का आधार

  • पंक्ति में दर्शन और खरची को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बताया गया है (दरसण पास्यूँ अलग, सुमरण पास्यूँ खरची अलग)।

अन्य विकल्पों का खंडन

  • 'कृष्ण के दर्शन' गलत है क्योंकि दर्शन चाकरी का मुख्य प्रतिफल है, खरची नहीं।
  • 'भाव रूपी भक्ति' गलत है क्योंकि यह 'जागीर' के रूप में प्राप्त होने वाली वस्तु है, खरची के रूप में नहीं ('भाव भगती जागीरी पास्यूँ')।
  • 'वृंदावन में रहना' काव्यांश में खरची के रूप में कहीं उल्लिखित नहीं है।

परीक्षा में सावधानी

  • पंक्ति की संरचना को ध्यान से समझना आवश्यक है - चाकरी के बदले तीन अलग-अलग प्रतिफल तीन अलग-अलग रूपकों (दर्शन, खरची-सुमरण, जागीर-भक्ति) में वर्णित हैं।

Common Mistakes

  1. 1'दर्शन' और 'खरची' को एक ही प्रतिफल समझ लेना, जबकि काव्यांश में इन्हें स्पष्ट रूप से अलग-अलग रूपकों में बाँटा गया है।
  2. 2'जागीर' के रूप में मिलने वाली भाव-भक्ति को खरची (जेब-खर्च) समझ लेना।

Interesting Facts

मीरा ने चाकरी के तीन प्रतिफलों को तीन अलग सामाजिक-आर्थिक रूपकों में बाँटा है - दर्शन (मुख्य सेवा-फल), खरची (जेब-खर्च रूपी सुमरण), और जागीर (स्थायी संपत्ति रूपी भाव-भक्ति) - जो मध्यकालीन सामंती व्यवस्था से प्रेरित प्रतीक-विधान है।

'सुमरण' शब्द भक्ति-काव्य में निरंतर ईश्वर-नाम के जप/स्मरण की साधना को दर्शाता है।

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Frequently Asked Questions

मीरा को खरची के रूप में क्या मिलेगा?

मीरा को खरची (जेब-खर्च) के रूप में 'सुमरण' यानी श्रीकृष्ण का नाम-स्मरण प्राप्त होगा।