Question 201 markMCQSection खंड - ग

कवि द्वारा भोर को 'राख से लीपा हुआ चौका' कहना प्रतिपादित करता है कि भोर का नभ :

उषा (शमशेर बहादुर सिंह) — आरोह भाग 2
उषा - राख से लीपा हुआ चौका उपमा

Options

(A)अपनी आभा से चमत्कृत कर रहा है ।
(B)प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ा रहा है ।
(C)सफेद व नीले वर्णों का अद्भुत मिश्रण है ।
(D)नए परिवर्तनों व आयामों का प्रतीक है ।

Official answer

सही विकल्प — (C) सफेद व नीले वर्णों का अद्भुत मिश्रण है। 'राख से लीपा हुआ चौका' उपमा से भोर के आकाश का धुंधला, राख-जैसा सफेदी लिए रंग झलकता है, जो शेष नभ की नीलिमा में घुलकर एक विशिष्ट रंग-सम्मिश्रण रचता है।

Answer keywords:राख से लीपा हुआ चौकारंग बिंबभोर का नभउपमा अलंकारशमशेर बहादुर सिंहउषा

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: सही विकल्प (C) चुनने पर पूर्ण अंक; आंशिक अंक नहीं दिए जाते।

Hint

'राख' के रंग (सफेद-धूसर) को शेष काव्यांश में वर्णित 'नील जल' से जोड़कर देखें।

Quick oral answer

'राख से लीपा हुआ चौका' उपमा से भोर के नभ का सफेद-धूसर रंग झलकता है, जो शेष आकाश की नीलिमा से मिलकर एक अनोखा रंग-सम्मिश्रण रचता है।

Common mistakes

  1. 1.'राख से लीपा हुआ चौका' को केवल स्वच्छता या चमक का प्रतीक मान लेना, जबकि यह मुख्यतः रंग (सफेद-धूसर) की उपमा है।
  2. 2.नभ के विशिष्ट रंग-वर्णन को नज़रअंदाज़ करके अमूर्त भावों (जैसे 'नए परिवर्तन का प्रतीक') की ओर बढ़ जाना।

Analysis and explanation

संदर्भ: राख से लीपा हुआ चौका ताज़ा (गीला) होने पर हल्का धूसर-सफेद दिखता है — कवि इसी रंग-बिंब से भोर के नभ की रंगत को दर्शाते हैं।


सही विकल्प क्यों: 'राख' का रंग सफेद-धूसर होता है और शेष काव्यांश में नभ की नीलिमा (नील जल) का भी उल्लेख है — दोनों मिलकर सफेद व नीले रंगों का अनोखा मिश्रण रचते हैं, जो भोर के आकाश की वास्तविक रंगत है।


अन्य विकल्प गलत क्यों:

  • (A) 'चमत्कृत करना' अत्यधिक चमक का भाव देता है, जबकि 'राख से लीपा चौका' धीमी, धुंधली रंगत का बिंब है।
  • (B) 'प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाना' एक अस्पष्ट, सामान्यीकृत कथन है जो रंग-विशेष की बात नहीं करता।
  • (D) 'नए परिवर्तनों का प्रतीक' अत्यधिक अमूर्त व्याख्या है, जबकि प्रश्न विशेष रूप से रंग-बिंब पर केंद्रित है।

Interesting facts

ग्रामीण भारत में परंपरागत रूप से रसोई के 'चौके' को राख/गोबर से लीपने की प्रथा रही है, जिससे उसकी सतह हल्की धूसर-सफेद और चिकनी दिखती है — कवि ने इसी सामान्य जीवन-बिंब से भोर के नभ की तुलना की है।

शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं में ग्रामीण-घरेलू बिंबों (चौका, सिल, केसर) का प्रयोग उनकी कविता को सहज और भारतीय संवेदना से जोड़े रखता है।

Question details

Q20 of 31 questions

Board
CBSE
Class
Class 12
Subject
Hindi Core
Year
2026
Section
Section खंड - ग
Marks
1
Type
MCQ
Chapter
उषा (शमशेर बहादुर सिंह) — आरोह भाग 2
Topic
उषा - राख से लीपा हुआ चौका उपमा
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
आरोह भाग 2, इकाई: काव्य खंड — 'उषा' (शमशेर बहादुर सिंह): रंग-बिंब योजना
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

Spotted a mistake or something unclear?

Tell us and we will fix it.

Frequently asked questions

'राख से लीपा हुआ चौका' उपमा का उपमेय क्या है ?

इस उपमा का उपमेय 'भोर का नभ' (आकाश) है, जिसकी धुंधली, सफेदी लिए रंगत की तुलना ताज़े राख से लीपे गए चौके से की गई है।

काव्यांश में नभ के रंग के लिए और कौन-सी उपमाएँ आई हैं ?

नभ के रंग के लिए 'बहुत काली सिल', 'ज़रा से लाल केसर से', 'स्लेट पर लाल खड़िया चाक' और 'नील जल' जैसी उपमाएँ आई हैं, जो मिलकर सफेद, काले, लाल व नीले रंगों का मिश्रण रचती हैं।