Question 168 marksLong AnswerSection खंड - ख

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में लिखिए : (2×4=82 \times 4 = 8)

(i) 'अप्रत्याशित विषयों पर लिखने से लेखन पर पकड़ मजबूत होती है ।' – कैसे ? स्पष्ट कीजिए ।

(ii) कहानी के पात्रों के नाट्य रूपांतरण में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? स्पष्ट कीजिए ।

(iii) रेडियो नाटक के लिए कहानी का चयन करते समय किन महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है और क्यों ?

अपठित बोध (गद्यांश)
अभिव्यक्ति और माध्यम - लेखन कौशल, नाट्य रूपांतरण व रेडियो नाटक

Official answer

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में अपेक्षित हैं; सुविधा हेतु तीनों बिंदुओं के उत्तर यहाँ दिए गए हैं:


(i) अप्रत्याशित विषयों पर लेखन से पकड़ मजबूत होना: अप्रत्याशित या असामान्य विषयों पर लिखने के लिए लेखक को नई शब्दावली खोजनी पड़ती है, विभिन्न स्रोतों से गहन जानकारी जुटानी पड़ती है और विषय को नए दृष्टिकोण से देखना पड़ता है। इस अभ्यास से लेखक की शोध-क्षमता, विश्लेषण-कौशल और भाषा पर पकड़ मजबूत होती है, जिससे वह भविष्य में किसी भी विषय पर सहजता व आत्मविश्वास से लिख पाता है।


(ii) कहानी के पात्रों के नाट्य रूपांतरण में सावधानियाँ: कहानी के प्रमुख पात्रों व घटनाओं का चयन कर कथावाचक शैली की जगह संवाद-प्रधान शैली अपनानी चाहिए। पात्रों के मनोभावों व द्वंद्व को संवाद तथा अभिनय-निर्देशों से प्रकट करना चाहिए, दृश्यों में विभाजन कर घटनाक्रम को मंचनयोग्य व संक्षिप्त बनाना चाहिए, तथा समय-स्थान की सीमाओं का ध्यान रखते हुए मूल कथा की भावना बनाए रखनी चाहिए।


(iii) रेडियो नाटक हेतु कहानी चयन: रेडियो केवल श्रव्य माध्यम है, अतः ऐसी कहानी चुनें जिसमें ध्वनि-प्रभावों व संवादों से दृश्य की कल्पना कराई जा सके। पात्रों की संख्या सीमित हो ताकि श्रोता आवाज़ों में भ्रमित न हों, कथानक रोचक व एकाग्रता बनाए रखने योग्य हो, और यह निर्धारित प्रसारण-समय (15-30 मिनट) के अनुकूल संक्षिप्त हो, क्योंकि रेडियो में दृश्य सहायता उपलब्ध नहीं होती।

Answer keywords:नाट्य रूपांतरणरेडियो नाटकसंवाद-प्रधान शैलीश्रव्य माध्यमअप्रत्याशित विषय लेखनपटकथा लेखनअभिव्यक्ति और माध्यम

Marking scheme

  1. 1.प्रत्येक सही उत्तर हेतु 4 अंक (कुल किन्हीं दो प्रश्नों के लिए 2×4=82 \times 4 = 8)
  2. 2.2 अंक: अवधारणा की सही व्याख्या
  3. 3.1 अंक: उपयुक्त बिंदुओं/उदाहरणों सहित विस्तार
  4. 4.1 अंक: भाषा की स्पष्टता व लगभग 80 शब्दों की सीमा का पालन

Hint

चुने गए दो उत्तरों में सिद्धांत/कारण बताकर उसे 2-3 ठोस बिंदुओं से समर्थित करें, लगभग 80 शब्दों में।

Quick oral answer

नाट्य रूपांतरण में कथावाचन को संवाद-प्रधान बनाना होता है; रेडियो नाटक के लिए सीमित पात्रों वाली, ध्वनि-प्रभावों से चित्रित की जा सकने वाली संक्षिप्त कहानी चुननी चाहिए; अप्रत्याशित विषयों पर लेखन शोध व भाषा-कौशल को मजबूत बनाता है।

Common mistakes

  1. 1.नाट्य रूपांतरण में केवल कहानी दोहरा देना, संवाद-शैली में परिवर्तन न करना
  2. 2.रेडियो नाटक के लिए कहानी चयन में 'दृश्य माध्यम' जैसी गलत धारणा रखना, जबकि रेडियो पूर्णतः श्रव्य है
  3. 3.'अप्रत्याशित विषय' प्रश्न में केवल उदाहरण देना, 'कैसे' अर्थात कारण स्पष्ट न करना

Analysis and explanation

संकल्पना: यह प्रश्न लेखन-कौशल के विस्तार, कथा से नाटक में रूपांतरण की प्रक्रिया, और रेडियो जैसे श्रव्य माध्यम की विशिष्ट माँगों की समझ जाँचता है।


परीक्षा में सावधानी: नाट्य रूपांतरण व रेडियो नाटक के उत्तरों में माध्यम की विशेषताओं (संवाद-प्रधानता, श्रव्यता, सीमित समय) को स्पष्ट रूप से जोड़ें; केवल कहानी न दोहराएँ।


वास्तविक जीवन में: आकाशवाणी पर प्रसारित रेडियो नाटकों और दूरदर्शन के धारावाहिकों में कहानियों के सफल नाट्य रूपांतरण के अनेक उदाहरण मिलते हैं।

Interesting facts

आकाशवाणी पर प्रसारित रेडियो नाटक परंपरा भारत में 1930 के दशक से चली आ रही है और आज भी यह श्रव्य कल्पनाशीलता का सशक्त माध्यम है

किसी कहानी को नाटक में ढालने की प्रक्रिया को 'नाट्य रूपांतरण' कहा जाता है, जिसमें मूल रचना की आत्मा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है

Question details

Q16 of 31 questions

Board
CBSE
Class
Class 12
Subject
Hindi Core
Year
2026
Section
Section खंड - ख
Marks
8
Type
Long Answer
Chapter
अपठित बोध (गद्यांश)
Topic
अभिव्यक्ति और माध्यम - लेखन कौशल, नाट्य रूपांतरण व रेडियो नाटक
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
अभिव्यक्ति और माध्यम: विशेष लेखन कौशल, कहानी का नाट्य रूपांतरण, रेडियो नाटक (दीर्घ उत्तरीय, किन्हीं दो प्रश्न)
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

रेडियो नाटक के लिए कहानी चुनते समय सबसे बड़ी सावधानी क्या है?

रेडियो पूर्णतः श्रव्य माध्यम है, इसलिए ऐसी कहानी चुनें जिसमें दृश्य-कल्पना ध्वनि-प्रभावों व संवादों से कराई जा सके तथा पात्रों की संख्या सीमित हो।

नाट्य रूपांतरण और कहानी में मुख्य अंतर क्या है?

कहानी में कथावाचक विवरण देता है, जबकि नाट्य रूपांतरण में घटनाओं व मनोभावों को संवाद, दृश्य-विभाजन व अभिनय-निर्देशों के माध्यम से मंचनयोग्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है।