Question 422 marksShort AnswerSection ग

तीसरी कसम फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को क्या समझाया ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?

बड़े भाई साहब (मुंशी प्रेमचंद) — कक्षा 9 पाठ (स्पर्श भाग-1)
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र — राजकपूर की सलाह

Official answer

तीसरी कसम की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को समझाया कि इस पर फ़िल्म बनाना व्यावसायिक दृष्टि से जोखिम भरा और घाटे का सौदा हो सकता है। फिर भी उन्होंने कहा कि यदि शैलेंद्र फ़िल्म बनाएँ, तो वे स्वयं हीरामन की भूमिका निभाएँगे। इससे राजकपूर की सच्ची मित्रता व कला के प्रति निष्ठा प्रकट होती है, जो व्यावसायिक लाभ से भी ऊपर थी।

Answer keywords:तीसरी कसमराजकपूरशैलेंद्रहीरामनमित्रताव्यावसायिक जोखिमकला के प्रति निष्ठा

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: राजकपूर द्वारा दी गई व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी और फिर भी अभिनय करने के निर्णय का उल्लेख।
  2. 2.1 अंक: व्यक्तित्व विशेषता (सच्ची मित्रता/उदारता/कला के प्रति समर्पण) का स्पष्ट उल्लेख।

Hint

याद रखें कि राजकपूर ने पहले व्यावसायिक जोखिम की बात कही, फिर भी मित्रता निभाते हुए अभिनय करने का निर्णय लिया — यही उनकी उदारता और सच्ची मित्रता को दर्शाता है।

Quick oral answer

राजकपूर ने शैलेंद्र को फ़िल्म के व्यावसायिक जोखिम के बारे में आगाह किया, पर फिर भी मित्रता निभाते हुए नायक की भूमिका निभाना स्वीकार किया — यह उनकी उदारता और सच्ची मित्रता को दर्शाता है।

Common mistakes

  1. 1.केवल 'राजकपूर ने अभिनय किया' लिखकर व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी वाला भाग छोड़ देना।
  2. 2.व्यक्तित्व विशेषता को स्पष्ट रूप से न लिखकर अस्पष्ट उत्तर देना।

Analysis and explanation

यह प्रश्न 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ में वर्णित राजकपूर-शैलेंद्र मित्रता और कला के प्रति समर्पण को समझने की क्षमता जाँचता है।


घटना

  • शैलेंद्र ने प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम' बनाने का साहसिक निर्णय लिया था।

राजकपूर की प्रतिक्रिया

  • राजकपूर ने कहानी की व्यावसायिक कमज़ोरियों को स्पष्ट रूप से बताया, परंतु मित्रता और कला के सम्मान में बिना किसी हिचकिचाहट फ़िल्म में अभिनय करना स्वीकार किया।

व्यक्तित्व-विशेषता

  • इससे उनकी सच्ची मित्रता, उदारता और कला के प्रति निष्ठा — व्यावसायिक लाभ से ऊपर — स्पष्ट होती है।

नोट

  • यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) का है; कक्षा 10 के 2026 बोर्ड पेपर में प्रयोग होने पर स्रोत सामग्री की पुनः जाँच उचित है।

परीक्षा में सावधानी

  • व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी और फिर भी सहयोग का निर्णय — दोनों बिंदु स्पष्ट रूप से लिखें।

Interesting facts

'तीसरी कसम' फ़िल्म फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित थी और 1966 में प्रदर्शित हुई थी।

यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) पाठ्यपुस्तक का हिस्सा है, न कि कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक का।

Question details

Q42 of 66 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course B
Year
2026
Section
Section ग
Marks
2
Type
Short Answer
Chapter
बड़े भाई साहब (मुंशी प्रेमचंद) — कक्षा 9 पाठ (स्पर्श भाग-1)
Topic
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र — राजकपूर की सलाह
Bloom's level
understand
Syllabus topic
[CORRECTED] संचयन भाग-1, कक्षा 9 पाठ्यक्रम — पाठ 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' (एस. बलवंत); NOTE: यह चैप्टर कक्षा 9 (संचयन भाग-1) का है, कक्षा 10 (कृतिका भाग-2) का नहीं — मूल एनरिचमेंट में 'कृतिका भाग-2' (कक्षा 10, कोर्स A) बताया गया था, जो दोहरी त्रुटि थी। कक्षा 10 बोर्ड पेपर में कक्षा 9 सामग्री आना पाठ्यक्रम-सीमा उल्लंघन है — स्रोत PDF से पुनः पुष्टि आवश्यक।
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

Spotted a mistake or something unclear?

Tell us and we will fix it.

Frequently asked questions

'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक एस. बलवंत हैं।

यह पाठ किस कक्षा की पुस्तक में है?

यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) की पुस्तक में है; कक्षा 10 के 2026 पेपर में इसके आने की स्थिति में स्रोत सामग्री की पुनः जाँच अनुशंसित है।