Question 43Short AnswerSection ग

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए :


स्याम म्हाने चाकर राखो जी,

गिरधारी लाला म्हाने चाकर राखो जी।

चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।

बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।

चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।

भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।

बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।

ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।

साँवरिया रा दरसण पास्यूँ पहर कुसुम्बी साड़ी।

अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
मीराबाई का भक्ति पद - काव्यांश (अपठित बोध)

Official answer

नोट: यह काव्यांश स्वयं में कोई प्रश्न नहीं है, बल्कि इसके आगे आने वाले पाँच बहुविकल्पीय प्रश्नों (क्रमांक 44-48) का आधार-काव्यांश (स्टेम) है।

  • इसके लिए कोई अंक निर्धारित नहीं है (0 अंक)।
  • विद्यार्थी को इसे ध्यानपूर्वक पढ़कर आगे आने वाले प्रत्येक प्रश्न के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन करना है।
Answer keywords:मीराबाईचाकरदर्शनभक्तिवृंदावनगिरधरसुमरणकाव्यांश

Marking scheme

  1. 1.इस अंश के लिए कोई पृथक अंक निर्धारित नहीं है (0 अंक)।
  2. 2.यह आगामी पाँच बहुविकल्पीय प्रश्नों 9(i) से 9(v) (क्रमांक 44-48, प्रत्येक 1 अंक) के लिए आधार-सामग्री (स्टेम) है।

Hint

काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और मीरा की भक्ति-भावना, दर्शन की लालसा तथा कृष्ण के रूप-वर्णन पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि आगे के सभी प्रश्न इसी पर आधारित हैं।

Quick oral answer

यह मीराबाई का भक्ति पद है जिसमें वे श्रीकृष्ण की सेविका बनकर नित्य उनका दर्शन पाने और उनकी लीलाओं का गान करने की इच्छा व्यक्त करती हैं।

Common mistakes

  1. 1.काव्यांश को सरसरी तौर पर पढ़कर आगे के बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर देना, जिससे विकल्पों में भ्रम होता है।
  2. 2.राजस्थानी-ब्रज मिश्रित शब्दावली (म्हाने, पास्यूँ, बणावं, चाकरी) को समझे बिना अर्थ का गलत अनुमान लगाना।

Analysis and explanation

यह काव्यांश मीराबाई के प्रसिद्ध भक्ति पद 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी' से लिया गया है, जो राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा में रचा गया है।


मूल भाव

  • मीरा श्रीकृष्ण (गिरधर/स्याम) से प्रार्थना करती हैं कि वे उन्हें अपनी दासी/सेविका (चाकर) बना लें।
  • सेविका बनकर वे नित्य बाग लगाएँगी, प्रतिदिन कृष्ण का दर्शन पाएँगी और वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीलाओं का गान करेंगी।

तीन प्रतिफल (चाकरी के बदले)

  • चाकरी में 'दर्शन'
  • खरची (जेब-खर्च) के रूप में 'सुमरण' (नाम-स्मरण)
  • जागीर के रूप में 'भाव-भक्ति'

रूप-वर्णन

  • मोरपंख का मुकुट, पीताम्बर वस्त्र और वैजयंती माला
  • ऊँचे महल बनवाकर उनमें खिड़कियाँ (बारी) रखने और कुसुम्बी साड़ी पहनकर साँवरिया (कृष्ण) का दर्शन पाने की कामना

परीक्षा में सावधानी

  • विद्यार्थी अक्सर राजस्थानी शब्दावली (म्हाने, पास्यूँ, बणावं) को न समझ पाने के कारण भ्रमित हो जाते हैं; शब्दों के प्रसंग से अर्थ निकालना आवश्यक है।
  • यह पद भक्तिकाल की सगुण भक्ति-धारा और दास्य भाव की भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

Interesting facts

यह पद मीराबाई की प्रसिद्ध भक्ति रचनाओं में से एक है, जिसमें वे स्वयं को श्रीकृष्ण की सेविका/दासी के रूप में प्रस्तुत करती हैं - इसे 'दास्य भाव' की भक्ति कहा जाता है।

मीराबाई की भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है, जिसमें 'म्हाने' (मुझे), 'पास्यूँ' (पाऊँगी) जैसे क्षेत्रीय शब्द प्रयुक्त हुए हैं।

Question details

Q43 of 66 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course B
Year
2026
Section
Section ग
Marks
0
Type
Short Answer
Chapter
अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
Topic
मीराबाई का भक्ति पद - काव्यांश (अपठित बोध)
Bloom's level
understand
Syllabus topic
खंड ग: अपठित बोध - काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

क्या इस काव्यांश (प्रश्न 43) के लिए अलग से अंक मिलते हैं?

नहीं, यह केवल आगे आने वाले पाँच बहुविकल्पीय प्रश्नों (9(i)-9(v)) के लिए आधार-काव्यांश है; इसके अपने कोई अंक निर्धारित नहीं हैं।

यह पद किस भक्ति परंपरा से संबंधित है?

यह मीराबाई की सगुण भक्ति (कृष्ण भक्ति) की दास्य भाव शैली से संबंधित है, जिसमें भक्त स्वयं को भगवान का सेवक/सेविका मानकर भक्ति करता है।