तीसरी कसम फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को क्या समझाया ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?
तीसरी कसम फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को क्या समझाया ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?
तीसरी कसम की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को समझाया कि इस पर फ़िल्म बनाना व्यावसायिक दृष्टि से जोखिम भरा और घाटे का सौदा हो सकता है। फिर भी उन्होंने कहा कि यदि शैलेंद्र फ़िल्म बनाएँ, तो वे स्वयं हीरामन की भूमिका निभाएँगे। इससे राजकपूर की सच्ची मित्रता व कला के प्रति निष्ठा प्रकट होती है, जो व्यावसायिक लाभ से भी ऊपर थी।
Marking Scheme
- 11 अंक: राजकपूर द्वारा दी गई व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी और फिर भी अभिनय करने के निर्णय का उल्लेख।
- 21 अंक: व्यक्तित्व विशेषता (सच्ची मित्रता/उदारता/कला के प्रति समर्पण) का स्पष्ट उल्लेख।
Hint
याद रखें कि राजकपूर ने पहले व्यावसायिक जोखिम की बात कही, फिर भी मित्रता निभाते हुए अभिनय करने का निर्णय लिया — यही उनकी उदारता और सच्ची मित्रता को दर्शाता है।
Quick Oral Answer
राजकपूर ने शैलेंद्र को फ़िल्म के व्यावसायिक जोखिम के बारे में आगाह किया, पर फिर भी मित्रता निभाते हुए नायक की भूमिका निभाना स्वीकार किया — यह उनकी उदारता और सच्ची मित्रता को दर्शाता है।
Analysis & Explanation
यह प्रश्न 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ में वर्णित राजकपूर-शैलेंद्र मित्रता और कला के प्रति समर्पण को समझने की क्षमता जाँचता है।
घटना
- शैलेंद्र ने प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम' बनाने का साहसिक निर्णय लिया था।
राजकपूर की प्रतिक्रिया
- राजकपूर ने कहानी की व्यावसायिक कमज़ोरियों को स्पष्ट रूप से बताया, परंतु मित्रता और कला के सम्मान में बिना किसी हिचकिचाहट फ़िल्म में अभिनय करना स्वीकार किया।
व्यक्तित्व-विशेषता
- इससे उनकी सच्ची मित्रता, उदारता और कला के प्रति निष्ठा — व्यावसायिक लाभ से ऊपर — स्पष्ट होती है।
नोट
- यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) का है; कक्षा 10 के 2026 बोर्ड पेपर में प्रयोग होने पर स्रोत सामग्री की पुनः जाँच उचित है।
परीक्षा में सावधानी
- व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी और फिर भी सहयोग का निर्णय — दोनों बिंदु स्पष्ट रूप से लिखें।
Common Mistakes
- 1केवल 'राजकपूर ने अभिनय किया' लिखकर व्यावसायिक जोखिम की चेतावनी वाला भाग छोड़ देना।
- 2व्यक्तित्व विशेषता को स्पष्ट रूप से न लिखकर अस्पष्ट उत्तर देना।
Interesting Facts
'तीसरी कसम' फ़िल्म फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित थी और 1966 में प्रदर्शित हुई थी।
यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) पाठ्यपुस्तक का हिस्सा है, न कि कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक का।
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Frequently Asked Questions
'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक एस. बलवंत हैं।
यह पाठ किस कक्षा की पुस्तक में है?
यह पाठ NCERT संचयन भाग-1 (कक्षा 9) की पुस्तक में है; कक्षा 10 के 2026 पेपर में इसके आने की स्थिति में स्रोत सामग्री की पुनः जाँच अनुशंसित है।