Question 122 marksVery Short AnswerSection क

'जिंदगी की नाव दोनों पतवारों से चलती है' कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

अपठित गद्यांश (पाठ्येतर/Unseen Passage – खंड क)
अपठित गद्यांश – 'जिंदगी की नाव दोनों पतवारों से चलती है' कथन की सार्थकता

Official answer

यह कथन सार्थक है क्योंकि जीवन-नाव को संतुलित व सही दिशा में आगे बढ़ाने हेतु सुख-दुख रूपी दोनों पतवारों का प्रयोग आवश्यक है। यदि व्यक्ति जिद करके केवल एक ही पतवार (केवल सुख) पकड़े और दुख को नकारे, तो नाव गोल-गोल चक्कर काटती है, अर्थात जीवन असंतुलित होकर ठहर जाता है। अतः दोनों पक्षों को अपनाकर ही जीवन-नाव किनारे तक पहुँचती है।

Answer keywords:दोनों पतवारसुख-दुख का संतुलनगोल-गोल चक्करजीवन की नावसंतुलित जीवनएकपक्षीय जिद

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: रूपक की सही व्याख्या — एक पतवार से नाव का गोल-गोल घूमना अर्थात एकपक्षीय जीवन का असंतुलन।
  2. 2.1 अंक: कथन की सार्थकता को गद्यांश के मूल विषय (सुख-दुख दोनों को अपनाकर संतुलित व सार्थक जीवन जीना) से जोड़कर स्पष्ट करने पर।

Hint

रूपक को स्पष्ट करें (एक पतवार = असंतुलन/गोल घूमना) और इसे गद्यांश के मुख्य विषय — सुख-दुख का सामंजस्य — से जोड़ें।

Quick oral answer

यह कथन सार्थक है क्योंकि जैसे नाव को आगे बढ़ने के लिए दोनों पतवारों की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन को संतुलित व सार्थक बनाने के लिए सुख और दुख दोनों को स्वीकारना जरूरी है।

Common mistakes

  1. 1.केवल रूपक (नाव-पतवार) को दोहरा देना, बिना यह स्पष्ट किए कि यह सुख-दुख के संतुलन से कैसे जुड़ा है।
  2. 2.'सार्थकता सिद्ध कीजिए' के बजाय केवल पंक्ति का अर्थ बता देना, तर्क या सिद्ध करने वाला दृष्टिकोण न अपनाना।
  3. 3.उत्तर में केवल एक पक्ष (जैसे केवल सुख की बात) पर बल देना, जबकि प्रश्न में 'दोनों पतवारों' का संतुलन ही केंद्रीय बिंदु है।

Analysis and explanation

यह कथन गद्यांश के अंतिम भाग के नाव-पतवार रूपक पर आधारित है, जो पूरे गद्यांश के केंद्रीय संदेश का सार प्रस्तुत करता है।


रूपक की व्याख्या

  • दोनों पतवार = सुख और दुख (जीवन के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पक्ष)
  • एक ही पतवार से नाव खेने पर वह गोल-गोल घूमती है, आगे नहीं बढ़ती — अर्थात एकपक्षीय जीवन असंतुलित होकर ठहर जाता है

सार्थकता की स्थापना

  • दोनों पतवारों का प्रयोग = जीवन में संतुलन व सार्थक प्रगति
  • यह गद्यांश के व्यापक विषय (विपरीत तत्व वास्तव में पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं) से सीधे जुड़ा है

परीक्षा में सावधानी

  • केवल रूपक को दोहरा देना पर्याप्त नहीं; पूर्ण अंकों के लिए रूपक की व्याख्या और उसका जीवन-दर्शन से संबंध — दोनों दर्शाना आवश्यक है।

Interesting facts

नाव और पतवार का प्रतीक भारतीय भक्ति व दार्शनिक साहित्य में जीवन-यात्रा और भवसागर पार करने के लिए प्रायः प्रयुक्त होता रहा है।

संतुलन (equilibrium) की यह अवधारणा आधुनिक मनोविज्ञान में भी 'भावनात्मक संतुलन' (emotional balance) के सिद्धांत से मेल खाती है, जिसमें सुख और दुख दोनों भावों को स्वीकारना मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना गया है।

Question details

Q12 of 66 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course B
Year
2026
Section
Section क
Marks
2
Type
Very Short Answer
Chapter
अपठित गद्यांश (पाठ्येतर/Unseen Passage – खंड क)
Topic
अपठित गद्यांश – 'जिंदगी की नाव दोनों पतवारों से चलती है' कथन की सार्थकता
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
खंड क: अपठित बोध – गद्यांश आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न 2(v)
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

यहाँ 'दोनों पतवार' किसका प्रतीक हैं?

दोनों पतवार सुख और दुख (या जीवन के सकारात्मक व नकारात्मक पक्षों) का प्रतीक हैं।

एक ही पतवार से नाव खेने पर क्या होता है, और इसका जीवन से क्या संबंध है?

नाव गोल-गोल घूमने लगती है, आगे नहीं बढ़ पाती — ठीक इसी प्रकार यदि जीवन में केवल एक पक्ष (सुख) को अपनाया जाए और दूसरे (दुख) को नकारा जाए, तो जीवन भी असंतुलित होकर ठहर जाता है।