CBSE Class 10 Hindi Course A — Short Answer Questions
Short answer questions from all previous year papers.
15 questions found
2026(15 questions)
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जब हम छोटे थे, हमें सिखाया गया कि होशियार बनो। अच्छे नंबर लाओ। जीत कर दिखाओ। धीरे-धीरे ये आदत तमाम सीखें आदत में बदल गईं और पता भी नहीं चला कि कब ये आदत हमारे मन की एक दौड़ में बदल गई। दूसरों से आगे निकलने की दौड़। कभी कक्षा में प्रथम आने की, कभी ऑफिस में पदोन्नति की, कभी समाज में इज़्ज़त कमाने की और कभी अपने ही भाई-बहनों, दोस्तों, रिश्तेदारों से बेहतर दिखने की। परंतु इस लगातार चलने वाली दौड़ में हम भूल गए कि जिस आत्मा को लेकर निकले थे, वह कहाँ है? हर सुबह उठते हैं और सोचते हैं कि किसे पछाड़ना है। हर शाम थककर सोते हैं और गिनते हैं कि कितने पीछे रह गए। यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं है, आत्मा की थकान भी है क्योंकि हमने अपनी गति किसी और की रफ़्तार से बाँध दी है। हम अपने फैसले किसी और की कामयाबी देखकर लेने लगे हैं। वो किताब क्यों पढ़ रहे हो? क्योंकि सब पढ़ रहे हैं। वो कोर्स क्यों कर रहे हो? क्योंकि उससे नौकरी मिलती है। शहर क्यों जा रहे हो? क्योंकि वहाँ ज़्यादा अवसर हैं। और धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी, हमारी नहीं रह जाती। वह एक नक़ल बन जाती है, दूसरों के रास्तों की, दूसरों के सपनों की। ऐसा नहीं है कि प्रतिस्पर्धा बुरी चीज है। आपको अगर किसी से आगे ही निकलना है, तो उस 'आप' से निकलिए, जो डरता है, जो टालता है, जो रोज़ कहता है 'कल से'। आपका अपना असली प्रतिद्वंद्वी कोई और नहीं, हमारा ही कल का, हमारा ही पुराना संस्करण है। आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमका कर पेश करता है, वहाँ अपने ही भीतर स्थिर रहना एक साधना है। खुशी और संतोष हमेशा भीतर से आते हैं और उनका रास्ता आत्म-साक्षात्कार से होकर जाता है, ना कि तुलना और प्रतियोगिता से।
· खंड क· अपठित गद्यांश — प्रतिस्पर्धा और आत्म-संतोष - 7
गाँव में वो दिन था इतवार। मैं नन्हीं पीढ़ी का हाथ थाम निकल गई बाज़ार। सूखे दरख़्तों के बीच देख एक पतली पगडंडी मैंने नन्हीं पीढ़ी से कहा देखो, यही थी कभी गाँव की नदी। आगे देख ज़मीन पर बड़ी सी दरार मैंने कहा, इसी में समा गए सारे पहाड़। नन्हीं पीढ़ी दौड़ी : हम आ गए बाज़ार! क्या-क्या लेना है? पूछने लगा दुकानदार। भैया! थोड़ी बारिश, थोड़ी गीली मिट्टी, एक बोतल नदी, वो डिब्बाबंद पहाड़ उधर दीवार पर टँगी एक प्रकृति भी दे दो, और ये बारिश इतनी महँगी क्यों? दुकानदार बोला : यह नमी यहाँ की नहीं! दूसरे ग्रह से आई है, मंदी है, छटाँक भर मँगाई है। पैसे निकालने को साड़ी की कोर टटोली चौंकी ! देखा आँचल की गाँठ में रुपयों की जगह पूरा वजूद मुड़ा पड़ा था...
· खंड क· अपठित काव्यांश — प्रकृति के विनाश और बाज़ारीकरण का चित्रण - 33
किसी दिन एक शिष्या ने डरते-डरते खाँ साहब को टोका, ''बाबा ! आप यह क्या करते हैं, इतनी प्रतिष्ठा है आपकी। अब तो आपको भारतरत्न भी मिल चुका है, यह फटी तहमद न पहना करें। अच्छा नहीं लगता, जब भी कोई आता है आप इसी फटी तहमद में सबसे मिलते हैं।'' खाँ साहब मुस्कराए। लाड़ से भरकर बोले, ''धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं। तुम लोगों की तरह बनाव सिंगार देखते रहते, तो उमर ही बीत जाती, हो चुकती शहनाई। तब क्या खाक रियाज़ हो पाता। ठीक है बिटिया, आगे से नहीं पहनेंगे, मगर इतना बताई देते हैं कि मालिक से यही दुआ है फटा सुर न बख्शों। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।''
· खंड ग· अपठित गद्यांश — उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की सरलता एवं विनम्रता - 39
'नेताजी का चश्मा' पाठ में नेताजी की मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होना बड़ी बात नहीं थी, बड़ी बात तो असली चश्मे की मौजूदगी थी। क्यों? उपयुक्त तर्कों के आधार पर उत्तर लिखिए।
2 marks· खंड ग· नेताजी की मूर्ति पर असली चश्मे का महत्व - 43
ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी। अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी। पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी। ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी। प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी। 'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।।
· खंड ग· सूरदास के पद — भ्रमरगीत - 49
परशुराम के आगमन के पश्चात् राजा जनक की सभा का दृश्य 'राम-लक्ष्मण-परशुराम' संवाद के आधार पर अपने शब्दों में वर्णित कीजिए।
2 marks· खंड ग· राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद — जनक की सभा का दृश्य - 51
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में बाँस या बबूल की संज्ञा से किसे संबोधित किया गया है और क्यों?
2 marks· खंड ग· यह दंतुरित मुस्कान — बांस/बबूल का प्रतीक - 53
'प्रयास करने पर पुरुष भी बच्चों का पालन-पोषण भली-भाँति कर सकते हैं।' 'माता का अँचल' पाठ में वर्णित भोलानाथ और उसके पिता के जीवन-प्रसंगों से दो उदाहरण लेते हुए इस कथन के पक्ष में उचित तर्क प्रस्तुत कीजिए।
4 marks· खंड ग· माता का अँचल — भोलानाथ और पिता का जीवन-प्रसंग - 55
क्या किसी एक लेखक के लिए जो बातें प्रेरणास्रोत हैं वे अन्य लेखक को भी प्रेरित कर सकती हैं? सहमति या असहमति को उचित तर्कों एवं उदाहरणों द्वारा 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के संदर्भ में लिखिए।
4 marks· खंड ग· मैं क्यों लिखता हूँ - लेखकीय प्रेरणा - 40
बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों से अलग कैसे था? वे उसके साथ किस प्रकार का बर्ताव करते थे?
2 marks· खंड ग· बालगोबिन भगत के बेटे का चरित्र-चित्रण - 42
'एक कहानी यह भी' पाठ में मन्नू भंडारी ने स्वयं पर अपने पिता के प्रभाव को स्वीकारा है। उनके व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए जो पिता के प्रभाव को दर्शाते हों।
2 marks· खंड ग· मन्नू भंडारी पर पिता के प्रभाव के पहलू - 41
किस आधार पर यह कहा जा सकता है कि 'लखनवी अंदाज़' पाठ में नवाब साहब खीरे के साथ देखे जाने पर ही असहज हो गए थे?
2 marks· खंड ग· नवाब साहब की नकली शान और खीरे का प्रसंग - 50
'संगतकार' कविता में कवि जिसे संगतकार की मनुष्यता बता रहा है वह वास्तव में उसका कर्त्तव्य ही है। इस कथन के पक्ष में उचित तर्कों को प्रस्तुत कीजिए।
2 marks· खंड ग· संगतकार — कर्त्तव्य बनाम मनुष्यता - 52
'उत्साह' कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट करते हुए लिखिए कि उसकी अभिव्यक्ति 'बादल' के सहारे क्यों की गई है?
2 marks· खंड ग· उत्साह — बादल का प्रतीकात्मक महत्व - 54
'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ की लेखिका को 'लायुंग' किन कारणों से अधिक पसंद आया? आपके विचार से किसी पर्यटन स्थल को प्रसिद्ध और दर्शनीय बनाने वाले बिंदु कौन-से होते हैं?
4 marks· खंड ग· साना-साना हाथ जोड़ि — लायुंग का आकर्षण और पर्यटन स्थल की विशेषताएँ