Q7
Short AnswerSection खंड क

गाँव में वो दिन था इतवार।

मैं नन्हीं पीढ़ी का हाथ थाम

निकल गई बाज़ार।

सूखे दरख़्तों के बीच देख

एक पतली पगडंडी

मैंने नन्हीं पीढ़ी से कहा

देखो, यही थी कभी गाँव की नदी।

आगे देख ज़मीन पर बड़ी सी दरार

मैंने कहा, इसी में समा गए सारे पहाड़।


नन्हीं पीढ़ी दौड़ी : हम आ गए बाज़ार!

क्या-क्या लेना है? पूछने लगा दुकानदार।

भैया! थोड़ी बारिश, थोड़ी गीली मिट्टी,

एक बोतल नदी, वो डिब्बाबंद पहाड़

उधर दीवार पर टँगी एक प्रकृति भी दे दो,

और ये बारिश इतनी महँगी क्यों?

दुकानदार बोला : यह नमी यहाँ की नहीं!

दूसरे ग्रह से आई है,

मंदी है, छटाँक भर मँगाई है।

पैसे निकालने को साड़ी की कोर टटोली


चौंकी ! देखा आँचल की गाँठ में

रुपयों की जगह

पूरा वजूद मुड़ा पड़ा था...

अपठित बोध (काव्यांश)
अपठित काव्यांश — प्रकृति के विनाश और बाज़ारीकरण का चित्रण
Official Answer

यह काव्यांश प्रश्न 8 से 12 तक का आधार है। कविता का केंद्रीय भाव है कि गाँव की नदी सूखकर पगडंडी बन गई और पहाड़ ज़मीन की दरार में समा गए — यानी प्राकृतिक संसाधन तेज़ी से नष्ट हो रहे हैं। बाज़ार में नन्हीं पीढ़ी बारिश, मिट्टी, नदी और पहाड़ माँगती है, जो बाज़ारीकरण की चरम सीमा और प्रकृति के प्रति उपेक्षा दर्शाता है। अंत में कवयित्री को रुपयों की जगह अपना 'मुड़ा वजूद' मिलता है, जो संकेत देता है कि प्रकृति के बिना मनुष्य का अस्तित्व भी खोखला हो जाता है।

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Marking Scheme

  • 1यह काव्यांश स्वयं में अंकित प्रश्न नहीं है — इसके अंक नीचे दिए गए प्रश्नों क्रमांक 8 से 12 में विभाजित हैं।

Hint

काव्यांश को दो बार पढ़ें और नदी, पहाड़, बारिश, मिट्टी, वजूद जैसे प्रतीकों के प्रतीकात्मक अर्थ पर ध्यान दें।

Quick Oral Answer

यह काव्यांश दिखाता है कि प्रकृति नष्ट होकर बाज़ार में बिकने वाली वस्तु बन गई है।

Analysis & Explanation

यह एक अपठित समसामयिक कविता है जो पर्यावरणीय संकट और बाज़ारीकरण पर केंद्रित है।


मूल भाव

  • सूखी नदी और लुप्त पहाड़ प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के प्रतीक हैं।
  • बाज़ार में नदी-पहाड़-बारिश का बिकना बाज़ारीकरण की चरम सीमा दर्शाता है।

हल करने की रणनीति

  • पूरी कविता को दो बार ध्यान से पढ़ें, फिर हर प्रश्न के लिए सीधा प्रमाण पंक्तियों में खोजें।
  • प्रतीकों (पगडंडी, दरार, बोतलबंद नदी) का भावार्थ समझकर उत्तर दें।

परीक्षा में सावधानी

  • यह अंश स्वयं अंकित नहीं है; इसके अंक प्रश्न 8 से 12 में बँटे हैं, इसलिए समय इसी अंश पर अधिक न लगाएँ।

Common Mistakes

  1. 1काव्यांश को सरसरी तौर पर पढ़कर सीधे प्रश्नों के उत्तर देना।
  2. 2प्रतीकों को शाब्दिक अर्थ में लेना।

Interesting Facts

जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व की कई छोटी नदियाँ सूख रही हैं।

भारत सरकार का 'कैच द रेन' अभियान जल संरक्षण हेतु है।

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Frequently Asked Questions

यह काव्यांश किस विषय पर आधारित है?

पर्यावरणीय संकट और बाज़ारीकरण पर।