'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।' पंक्ति किसके संबंध में कही गई है तथा इसका क्या आशय है?
'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।' पंक्ति किसके संबंध में कही गई है तथा इसका क्या आशय है?
Options
Official answer
सही विकल्प (क) — यह पंक्ति उद्धव के संबंध में है : उन्होंने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए और श्रीकृष्ण के सौंदर्य से उनकी दृष्टि तनिक भी मोहित/रँगी नहीं हुई।
Marking scheme
- 1.1 अंक: सही विकल्प (क) के चयन हेतु।
Hint
याद रखें: यह संपूर्ण पद उद्धव को संबोधित है; 'प्रीति-नदी' में पाँव न डुबाना और दृष्टि का रूप से न रँगना — दोनों उद्धव की निर्लिप्तता के प्रतीक हैं, कृष्ण के वर्णन नहीं।
Quick oral answer
यह पंक्ति उद्धव के लिए कही गई है — उन्होंने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए, अर्थात कृष्ण के सौंदर्य से भी उनका मन तनिक भी प्रभावित नहीं हुआ।
Common mistakes
- 1.'प्रीति-नदी' की उपमा को कृष्ण या गोपियों से जोड़ देना, जबकि यह उद्धव के निर्लिप्त स्वभाव के वर्णन की शृंखला का ही भाग है।
- 2.पद के संपूर्ण संबोधन (उद्धव को) को भूलकर पंक्ति का अर्थ पात्र से अलग कर लेना।
Analysis and explanation
यह प्रश्न 'प्रीति-नदी' वाली पंक्ति का संबंध और आशय पूछता है।
संकल्पना
- संपूर्ण पद आरंभ से अंत तक उद्धव को संबोधित है; यह पंक्ति कमल-पत्र व तेल-घट की उपमा-शृंखला को आगे बढ़ाते हुए उद्धव की निर्लिप्तता को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
- उद्धव ने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए, अर्थात प्रेम-भावना में तनिक भी सम्मिलित नहीं हुए, और कृष्ण-सौंदर्य से उनकी दृष्टि मोहित नहीं हुई।
परीक्षा में सावधानी
- यह पंक्ति गोपियों (जो प्रेम में पूर्णतः डूबी हैं), कृष्ण के रूप-वर्णन, या स्वयं सूरदास से संबंधित नहीं — केवल उद्धव के आचरण से संबंधित है।
Interesting facts
सूरदास पूरे पद में एक ही विस्तारित रूपक-शृंखला (कमल-पत्र, तेल-घट, प्रीति-नदी) का प्रयोग करते हैं — यह तीनों उपमाएँ एक ही पात्र (उद्धव) की निर्लिप्तता को अलग-अलग कोणों से स्पष्ट करती हैं।
Question details
Q48 of 64 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course A
- Year
- 2026
- Section
- Section खंड ग
- Marks
- 1
- Type
- MCQ
- Chapter
- यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
- Topic
- सूरदास के पद — भ्रमरगीत
- Bloom's level
- understand
- Syllabus topic
- काव्य खंड: 'पद' (सूरदास) — उद्धव के निर्लिप्त स्वभाव से संबंधित प्रतीक 'प्रीति-नदी'
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ' पंक्ति किसके संबंध में है?
यह पंक्ति उद्धव के संबंध में है, जो दर्शाती है कि उन्होंने प्रेम-भावना में तनिक भी सहभागिता नहीं की और कृष्ण के सौंदर्य से भी उनकी दृष्टि प्रभावित नहीं हुई।