Question 481 markMCQSection खंड ग

'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।' पंक्ति किसके संबंध में कही गई है तथा इसका क्या आशय है?

यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
सूरदास के पद — भ्रमरगीत

Options

(क)उद्धव के संबंध में — वे प्रेम-भावना में तनिक भी सम्मिलित नहीं हुए और कृष्ण के सौंदर्य से उनकी दृष्टि प्रभावित नहीं हुई।
(ख)गोपियों के संबंध में — वे प्रेम रूपी नदी में पूर्णतः डूबी हुई हैं।
(ग)श्रीकृष्ण के संबंध में — वे प्रेम रूपी नदी के समान अथाह हैं।
(घ)सूरदास के संबंध में — वे स्वयं भक्ति-रस में डूबे हुए कवि हैं।

Official answer

सही विकल्प (क) — यह पंक्ति उद्धव के संबंध में है : उन्होंने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए और श्रीकृष्ण के सौंदर्य से उनकी दृष्टि तनिक भी मोहित/रँगी नहीं हुई।

Answer keywords:प्रीति-नदीउद्धवनिर्लिप्ततादृष्टि न रूप परागीभ्रमरगीत

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: सही विकल्प (क) के चयन हेतु।

Hint

याद रखें: यह संपूर्ण पद उद्धव को संबोधित है; 'प्रीति-नदी' में पाँव न डुबाना और दृष्टि का रूप से न रँगना — दोनों उद्धव की निर्लिप्तता के प्रतीक हैं, कृष्ण के वर्णन नहीं।

Quick oral answer

यह पंक्ति उद्धव के लिए कही गई है — उन्होंने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए, अर्थात कृष्ण के सौंदर्य से भी उनका मन तनिक भी प्रभावित नहीं हुआ।

Common mistakes

  1. 1.'प्रीति-नदी' की उपमा को कृष्ण या गोपियों से जोड़ देना, जबकि यह उद्धव के निर्लिप्त स्वभाव के वर्णन की शृंखला का ही भाग है।
  2. 2.पद के संपूर्ण संबोधन (उद्धव को) को भूलकर पंक्ति का अर्थ पात्र से अलग कर लेना।

Analysis and explanation

यह प्रश्न 'प्रीति-नदी' वाली पंक्ति का संबंध और आशय पूछता है।


संकल्पना

  • संपूर्ण पद आरंभ से अंत तक उद्धव को संबोधित है; यह पंक्ति कमल-पत्र व तेल-घट की उपमा-शृंखला को आगे बढ़ाते हुए उद्धव की निर्लिप्तता को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु

  • उद्धव ने प्रेम रूपी नदी में पाँव तक नहीं डुबोए, अर्थात प्रेम-भावना में तनिक भी सम्मिलित नहीं हुए, और कृष्ण-सौंदर्य से उनकी दृष्टि मोहित नहीं हुई।

परीक्षा में सावधानी

  • यह पंक्ति गोपियों (जो प्रेम में पूर्णतः डूबी हैं), कृष्ण के रूप-वर्णन, या स्वयं सूरदास से संबंधित नहीं — केवल उद्धव के आचरण से संबंधित है।

Interesting facts

सूरदास पूरे पद में एक ही विस्तारित रूपक-शृंखला (कमल-पत्र, तेल-घट, प्रीति-नदी) का प्रयोग करते हैं — यह तीनों उपमाएँ एक ही पात्र (उद्धव) की निर्लिप्तता को अलग-अलग कोणों से स्पष्ट करती हैं।

Question details

Q48 of 64 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course A
Year
2026
Section
Section खंड ग
Marks
1
Type
MCQ
Chapter
यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
Topic
सूरदास के पद — भ्रमरगीत
Bloom's level
understand
Syllabus topic
काव्य खंड: 'पद' (सूरदास) — उद्धव के निर्लिप्त स्वभाव से संबंधित प्रतीक 'प्रीति-नदी'
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ' पंक्ति किसके संबंध में है?

यह पंक्ति उद्धव के संबंध में है, जो दर्शाती है कि उन्होंने प्रेम-भावना में तनिक भी सहभागिता नहीं की और कृष्ण के सौंदर्य से भी उनकी दृष्टि प्रभावित नहीं हुई।