परशुराम के आगमन के पश्चात् राजा जनक की सभा का दृश्य 'राम-लक्ष्मण-परशुराम' संवाद के आधार पर अपने शब्दों में वर्णित कीजिए।
परशुराम के आगमन के पश्चात् राजा जनक की सभा का दृश्य 'राम-लक्ष्मण-परशुराम' संवाद के आधार पर अपने शब्दों में वर्णित कीजिए।
शिव-धनुष टूटने की आवाज़ सुनकर क्रोधित परशुराम फरसा व धनुष-बाण लिए जनक की सभा में आते हैं; उनके भयानक रूप से सभा सन्नाटे में डूब जाती है और राजा जनक सहित सभी भयभीत होकर चुप हो जाते हैं। लक्ष्मण निडर होकर व्यंग्यपूर्ण उत्तर देते हैं, जिससे परशुराम और क्रुद्ध हो उठते हैं, जबकि राम अत्यंत विनम्रता से उन्हें शांत करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार सभा का दृश्य भय, स्तब्धता, वाग्युद्ध व नाटकीय तनाव से भर जाता है।
Marking Scheme
- 11 अंक: परशुराम के क्रोधित प्रवेश और सभा में छाए भय/सन्नाटे का सही वर्णन।
- 21 अंक: लक्ष्मण की निर्भीक उक्तियों और राम की विनम्र भूमिका का उल्लेख।
Hint
सभा का वर्णन क्रमवार करें — परशुराम का प्रवेश, सभा में सन्नाटा, लक्ष्मण की निर्भीकता, राम की विनम्रता।
Quick Oral Answer
शिव-धनुष टूटने पर क्रोधित परशुराम जनक की सभा में आते हैं, सभा भय से स्तब्ध हो जाती है, लक्ष्मण निडरता से उत्तर देते हैं और राम विनम्रता से स्थिति को संभालते हैं।
Analysis & Explanation
यह प्रश्न तुलसीदास रचित 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' (रामचरितमानस, बालकांड — क्षितिज भाग 2) पर आधारित है।
प्रसंग
- सीता-स्वयंवर में राम द्वारा शिव-धनुष तोड़े जाने के बाद क्रोधित परशुराम सभा में आते हैं।
- सभा में भय-सन्नाटा, लक्ष्मण की निर्भीकता तथा राम की विनम्रता — इन सबका मिश्रण दृश्य को नाटकीय बनाता है।
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी प्रायः केवल परशुराम के क्रोध का वर्णन करते हैं और सभा के समग्र वातावरण को छोड़ देते हैं, जिससे अंक कटते हैं।
- पूर्ण अंक हेतु दृश्य क्रमबद्ध लिखें: क्रोधित प्रवेश → सभा में स्तब्धता → लक्ष्मण-परशुराम वाग्युद्ध → राम की शांत भूमिका।
वास्तविक जीवन
- यह प्रसंग सिखाता है कि क्रोधित व्यक्ति के सामने संयम व विनम्रता से स्थिति नियंत्रित की जा सकती है, जबकि अनुचित उकसावे से टकराव बढ़ता है।
Common Mistakes
- 1केवल परशुराम के क्रोध का वर्णन करना और सभा के समग्र वातावरण (भय, स्तब्धता) को छोड़ देना।
- 2लक्ष्मण की व्यंग्यात्मक उक्तियों और राम की विनम्रता के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट न करना।
Interesting Facts
यह प्रसंग तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' के बालकांड से लिया गया है, जिसे 16वीं शताब्दी (लगभग 1574 ई.) में अवधी भाषा में रचा गया था।
इस संवाद में वीर रस, रौद्र रस और हास्य रस का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो इसे पाठ्यक्रम के सबसे नाटकीय प्रसंगों में से एक बनाता है।
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Frequently Asked Questions
परशुराम सभा में क्रोधित होकर क्यों आए?
शिव-धनुष टूटने की भयंकर ध्वनि सुनकर परशुराम को क्रोध आया क्योंकि वह धनुष उनके गुरु शिव का था, इसलिए वे दंड देने के उद्देश्य से सभा में आए।
सभा में सबसे अधिक निडरता किसने दिखाई?
लक्ष्मण ने परशुराम के समक्ष सबसे अधिक निडरता और व्यंग्यपूर्ण उत्तर देकर साहस दिखाया।