'संगतकार' कविता में कवि जिसे संगतकार की मनुष्यता बता रहा है वह वास्तव में उसका कर्त्तव्य ही है। इस कथन के पक्ष में उचित तर्कों को प्रस्तुत कीजिए।
'संगतकार' कविता में कवि जिसे संगतकार की मनुष्यता बता रहा है वह वास्तव में उसका कर्त्तव्य ही है। इस कथन के पक्ष में उचित तर्कों को प्रस्तुत कीजिए।
Official answer
संगतकार मुख्य गायक से थोड़ा नीचे व पीछे रहकर गाता है, स्वर भटकने पर उसे सहारा देकर पुनः सही सुर में लाता है, तथा मुखड़ा दोहराकर याद दिलाता है — ये सभी उसके पेशे की माँग हैं, न कि कोई विशेष उदारता। अतः कवि जिसे 'मनुष्यता' कहकर महिमामंडित करता है, वह वास्तव में संगतकार के पेशे का अनिवार्य कर्त्तव्य है, भले ही वह भावनात्मक रूप में प्रकट होता हो।
Marking scheme
- 1.1 अंक: संगतकार के कार्यों (सुर में साथ, मुखड़ा दोहराना, सँभालना) का उल्लेख करते हुए इन्हें उसके कर्त्तव्य के रूप में स्थापित करना।
- 2.1 अंक: तर्कसंगत निष्कर्ष कि कवि द्वारा 'मनुष्यता' कहा गया गुण वास्तव में पेशागत दायित्व है।
Hint
संगतकार के तीन मुख्य कार्यों — सुर में साथ देना, मुखड़ा दोहराना, गायक को सँभालना — को उसके पेशागत दायित्व के रूप में सिद्ध करें।
Quick oral answer
संगतकार का सुर में साथ देना और गायक को सँभालना उसका पेशागत कर्त्तव्य है, भले ही कवि इसे भावुकता से 'मनुष्यता' कहकर व्यक्त करता है।
Common mistakes
- 1.केवल संगतकार की करुणा और सहानुभूति का वर्णन करना, कर्त्तव्य पक्ष को सिद्ध न करना।
- 2.प्रश्न के 'तर्क प्रस्तुत करने' के निर्देश को अनदेखा कर केवल कविता का सारांश लिख देना।
Analysis and explanation
यह प्रश्न मंगलेश डबराल की कविता 'संगतकार' (क्षितिज भाग 2) पर आधारित है।
अवधारणा
- सहगायक (संगतकार) की भूमिका को समाज के उन साधारण लोगों का प्रतीक माना गया है जो मुख्य कर्ता को सहारा देकर स्वयं गुमनाम रह जाते हैं।
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी अक्सर केवल संगतकार की करुणा व सहानुभूति बता देते हैं और मांगा गया तर्क — कि यह वास्तव में उसका पेशागत कर्त्तव्य है — छोड़ देते हैं, जिससे विश्लेषणात्मक अंक कटते हैं।
- उत्तर में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सुर में साथ देना, मुखड़ा दोहराना व सँभालना — ये उसके कार्य-विवरण (job) का हिस्सा हैं, इसलिए इसे 'मनुष्यता' कहना कवि की भावुक व्याख्या मात्र है।
वास्तविक जीवन
- यह प्रसंग उन सहायकों व पृष्ठभूमि में काम करने वालों की याद दिलाता है जिनका योगदान 'कर्त्तव्य' समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जबकि वही सफलता की वास्तविक नींव होते हैं।
Interesting facts
मंगलेश डबराल हिंदी के प्रसिद्ध समकालीन कवि हैं और यह कविता उनके संग्रह 'हम जो देखते हैं' से ली गई है।
यह कविता शास्त्रीय संगीत की परंपरा में सहगायक (संगतकार) की भूमिका को समाज के अनाम सहायकों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत करती है।
Question details
Q50 of 64 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course A
- Year
- 2026
- Section
- Section खंड ग
- Marks
- 2
- Type
- Short Answer
- Chapter
- यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
- Topic
- संगतकार — कर्त्तव्य बनाम मनुष्यता
- Bloom's level
- analyze
- Syllabus topic
- क्षितिज भाग 2: काव्य खंड — 'संगतकार' (मंगलेश डबराल)
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
संगतकार कौन होता है?
संगतकार वह सहगायक होता है जो शास्त्रीय संगीत में मुख्य गायक के साथ सुर में साथ देता है और उसे सहारा देता है।
कविता में संगतकार की तुलना किससे की गई है?
कविता में संगतकार की तुलना समाज के उन साधारण, गुमनाम लोगों से की गई है जो महान व्यक्तियों की सफलता के पीछे सहयोग देते हैं।