'एक कहानी यह भी' पाठ में मन्नू भंडारी ने स्वयं पर अपने पिता के प्रभाव को स्वीकारा है। उनके व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए जो पिता के प्रभाव को दर्शाते हों।
'एक कहानी यह भी' पाठ में मन्नू भंडारी ने स्वयं पर अपने पिता के प्रभाव को स्वीकारा है। उनके व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए जो पिता के प्रभाव को दर्शाते हों।
Official answer
मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर पिता का प्रभाव दो पहलुओं में स्पष्ट है। पहला, महत्वाकांक्षा और उच्च लक्ष्य की प्रवृत्ति - पिता विद्वान, सुधारवादी व्यक्ति थे जो चाहते थे बेटियाँ भी उच्च शिक्षा पाएँ, इसी से मन्नू में पढ़ाई व आत्म-विकास के प्रति महत्वाकांक्षा जागी। दूसरा, विद्रोही और निर्भीक स्वभाव - पिता के कठोर, अनुशासनप्रिय व्यवहार की प्रतिक्रिया में मन्नू में अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस व स्पष्टवादिता विकसित हुई, जो आगे उनके लेखन व सामाजिक सक्रियता में झलकती है।
Marking scheme
- 1.1 अंक: पहला पहलू - पिता की महत्वाकांक्षा/प्रगतिशील सोच के प्रभाव से मन्नू में शिक्षा व आत्म-विकास के प्रति महत्वाकांक्षा का विकसित होना।
- 2.1 अंक: दूसरा पहलू - पिता के कठोर/अनुशासनप्रिय स्वभाव के प्रभाव से मन्नू में विद्रोही, निर्भीक व स्पष्टवादी स्वभाव का विकसित होना।
Hint
पिता के दो अलग-अलग गुणों - महत्वाकांक्षा/प्रगतिशील सोच और कठोर अनुशासन - को मन्नू के व्यक्तित्व से जोड़कर लिखें।
Quick oral answer
पिता के प्रगतिशील/महत्वाकांक्षी स्वभाव से मन्नू में शिक्षा के प्रति महत्वाकांक्षा जागी, और पिता के कठोर स्वभाव के प्रतिक्रियास्वरूप उनमें विद्रोही व निर्भीक व्यक्तित्व विकसित हुआ।
Common mistakes
- 1.केवल पिता के कठोर/क्रोधी स्वभाव का उल्लेख करना, प्रगतिशील/महत्वाकांक्षी पहलू को छोड़ देना।
- 2.उत्तर में केवल एक पहलू लिखना जबकि प्रश्न में स्पष्ट रूप से 'दो पहलू' मांगे गए हैं।
Analysis and explanation
मन्नू भंडारी का आत्मकथ्य 'एक कहानी यह भी' पिता के व्यक्तित्व के गहरे प्रभाव को उजागर करता है।
अवधारणा - पहला पहलू (महत्वाकांक्षा)
- पिता विद्वान, अनुशासनप्रिय व सुधारवादी थे, चाहते थे बेटियाँ भी उच्च शिक्षा पाएँ - उस समय के लिए असाधारण सोच।
- इससे मन्नू में पढ़ाई व आत्म-निर्भरता के प्रति गहरी लगन पैदा हुई।
अवधारणा - दूसरा पहलू (विद्रोही स्वभाव)
- पिता के कठोर, अपेक्षाओं से भरे स्वभाव के कारण मन्नू में विद्रोह, आत्मविश्वास व निर्भीकता विकसित हुई - जैसे भारत छोड़ो आंदोलन में भागीदारी।
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी अक्सर पिता के केवल एक पक्ष (कठोरता) का उल्लेख करते हैं, प्रगतिशील सोच का पहलू छोड़ देते हैं, जिससे उत्तर अधूरा रह जाता है - दोनों पहलू आवश्यक हैं।
Interesting facts
मन्नू भंडारी हिंदी की प्रसिद्ध कहानीकार और उपन्यासकार थीं, जिनकी रचना 'महाभोज' अत्यंत चर्चित रही है।
उनके पिता स्वयं हिंदी-शब्दकोश निर्माण जैसे विद्वतापूर्ण कार्यों में संलग्न थे, जिससे मन्नू में भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि पनपी।
Question details
Q42 of 64 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course A
- Year
- 2026
- Section
- Section खंड ग
- Marks
- 2
- Type
- Short Answer
- Chapter
- अपठित बोध (काव्यांश)
- Topic
- मन्नू भंडारी पर पिता के प्रभाव के पहलू
- Bloom's level
- understand
- Syllabus topic
- गद्य खंड: एक कहानी यह भी — मन्नू भंडारी का आत्मकथ्य और पारिवारिक प्रभाव
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
मन्नू भंडारी के पिता का स्वभाव कैसा था?
वे विद्वान, महत्वाकांक्षी, सुधारवादी परंतु अनुशासनप्रिय और कठोर स्वभाव के व्यक्ति थे।
पिता के प्रभाव से मन्नू में कौन-सा प्रमुख गुण विकसित हुआ?
शिक्षा के प्रति महत्वाकांक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का निर्भीक, विद्रोही स्वभाव।