बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों से अलग कैसे था? वे उसके साथ किस प्रकार का बर्ताव करते थे?
बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों से अलग कैसे था? वे उसके साथ किस प्रकार का बर्ताव करते थे?
Official answer
बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों की तरह लाड़-प्यार व खेल-कूद में नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन और साधना के माहौल में पला था - वह मधुर स्वर में भजन गाकर पिता के साथ कीर्तन-मंडली में सम्मिलित होता था। भगत उसके साथ मोह-भरा नहीं, बल्कि एक साधक जैसा व्यवहार करते थे। इसीलिए बेटे की असामयिक मृत्यु पर उन्होंने शोक न मनाकर आत्मा की परमात्मा से मिलन मानकर खुशी से गीत गाए, तथा विधवा बहू का पुनर्विवाह कराने का दृढ़ निश्चय लिया - यह उनकी मोह-रहित आध्यात्मिक दृष्टि दर्शाता है।
Marking scheme
- 1.1 अंक: बेटे की विशिष्टता - सामान्य बच्चों की तरह न होकर भजन-कीर्तन/साधना में रत रहना - स्पष्ट करना।
- 2.1 अंक: भगत का बेटे के प्रति मोह-रहित, आध्यात्मिक व्यवहार (मृत्यु पर शोक न मनाना, बहू का पुनर्विवाह कराना) स्पष्ट करना।
Hint
बेटे की भक्ति-साधना और भगत के मोह-रहित, आध्यात्मिक व्यवहार को जोड़कर उत्तर लिखें।
Quick oral answer
बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों की तरह न होकर भजन-कीर्तन में रत रहता था, और भगत ने भी उसके साथ मोह-रहित, आध्यात्मिक दृष्टि से व्यवहार किया - यहाँ तक कि मृत्यु पर भी शोक नहीं मनाया।
Common mistakes
- 1.केवल घटना (बेटे की मृत्यु पर खुशी मनाना) बताना, बिना उसके पीछे के आध्यात्मिक तर्क के।
- 2.'सामान्य बच्चों से अलग कैसे था' वाले भाग को छोड़कर सीधे मृत्यु-प्रसंग पर चले जाना।
Analysis and explanation
यह प्रश्न बालगोबिन भगत की सबसे विशिष्ट विशेषता - मोह-माया से मुक्त आध्यात्मिक दृष्टिकोण - को उजागर करता है।
अवधारणा
- बेटा सामान्य बच्चों की तरह खेल-कूद में नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन व साधना में रमा रहता था।
- भगत का विश्वास था कि जीवन का उद्देश्य सांसारिक सुख नहीं, आत्मा की परमात्मा से एकता है।
व्यवहार
- बेटे की मृत्यु पर शोक के बजाय उत्सव मनाया, क्योंकि उनकी दृष्टि में मृत्यु आत्मा-परमात्मा मिलन का शुभ अवसर थी।
- विधवा बहू को पुनर्विवाह के लिए प्रेरित किया - उस समय के समाज के लिए क्रांतिकारी कदम।
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी अक्सर केवल घटना (मृत्यु पर खुशी मनाई) लिख देते हैं, पर इसके पीछे का दार्शनिक तर्क - मोह-मुक्ति व भक्ति-भावना - बताना भूल जाते हैं।
Interesting facts
बालगोबिन भगत कबीरपंथी साधक थे और कबीर के भजन गाकर खेतों में काम करते हुए भी भक्ति में लीन रहते थे।
पाठ में विधवा-पुनर्विवाह जैसा प्रगतिशील विचार 20वीं सदी के ग्रामीण भारत के परिप्रेक्ष्य में असाधारण साहसिक कदम माना जाता है।
Question details
Q40 of 64 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course A
- Year
- 2026
- Section
- Section खंड ग
- Marks
- 2
- Type
- Short Answer
- Chapter
- अपठित बोध (काव्यांश)
- Topic
- बालगोबिन भगत के बेटे का चरित्र-चित्रण
- Bloom's level
- understand
- Syllabus topic
- गद्य खंड: बालगोबिन भगत — पिता-पुत्र संबंध और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
बालगोबिन भगत के बेटे की मृत्यु पर उन्होंने क्या किया?
उन्होंने शोक न मनाकर खुशी से गीत गाए और नाचे, क्योंकि वे मृत्यु को आत्मा की परमात्मा से मुक्ति मानते थे।
भगत ने अपनी बहू के लिए क्या निर्णय लिया?
उन्होंने विधवा बहू का पुनर्विवाह कराने का दृढ़ निश्चय लिया, जो उस समय क्रांतिकारी कदम था।