रात्रि के भयावहपन का उल्लेख किस प्रभाव को दर्शाने के लिए किया गया है ?
रात्रि के भयावहपन का उल्लेख किस प्रभाव को दर्शाने के लिए किया गया है ?
Options
सही विकल्प: (B) निस्तब्धता में मानवीय पीड़ा की झलक दिखाने हेतु
सियारों के क्रंदन और पेचक की डरावनी आवाज़ जैसी भयावह ध्वनियाँ रात्रि की निस्तब्धता को तोड़ते हुए गाँव की झोंपड़ियों से उठती कराहने, 'हरे राम! हे भगवान!' की पुकार और बच्चों के 'माँ-माँ' रोने की आवाज़ों को उभारती हैं, जिससे महामारी-पीड़ित मनुष्यों की गहरी पीड़ा प्रकट होती है।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (B) चुनने पर ही अंक; भ्रामक विकल्पों (A, C, D) पर अंक नहीं दिया जाएगा।
Hint
देखें कि भयावह ध्वनियों के तुरंत बाद गद्यांश में किस मानवीय दृश्य का वर्णन आता है।
Quick Oral Answer
रात्रि के भयावहपन का वर्णन निस्तब्धता के भीतर छिपी मानवीय पीड़ा—कराहना, ईश्वर को पुकारना और बच्चों का रोना—को उजागर करने के लिए किया गया है।
Analysis & Explanation
गद्यांश की पृष्ठभूमि
गद्यांश में रात्रि की निस्तब्धता को बार-बार सियारों के रोने और पेचक की डरावनी आवाज़ से भंग होते दिखाया गया है, ठीक बाद ही गाँव की झोंपड़ियों से मानवीय कराहने-पुकारने की आवाज़ें वर्णित हैं।
सही विकल्प का औचित्य
रात्रि के भयावहपन का वर्णन केवल डर उपजाने के लिए नहीं, बल्कि इस सन्नाटे के भीतर छिपी मानवीय पीड़ा — बीमारों का कराहना, ईश्वर को पुकारना, बच्चों का सिसकना — को उभारकर पाठक तक पहुँचाने के लिए किया गया है।
अन्य विकल्प क्यों गलत
- (A) 'महामारी' शब्द का सीधा उल्लेख गद्यांश में नहीं है; यह प्रश्न भयावह ध्वनियों के साहित्यिक प्रयोजन पर केंद्रित है, सीधे कथन पर नहीं।
- (C) गद्यांश में चहल-पहल नहीं बल्कि शोक और पीड़ा का वातावरण है, अतः यह विकल्प भाव के सर्वथा विपरीत है।
- (D) बच्चे भय और पीड़ा में 'माँ-माँ' पुकारकर रोते हैं, उत्साह या निडरता प्रदर्शित नहीं करते।
परीक्षा में सावधानी
प्रयोजन-आधारित प्रश्नों में गद्यांश की समग्र भावभूमि (यहाँ शोक व पीड़ा) को ध्यान में रखकर ही विकल्प चुनें।
Common Mistakes
- 1विकल्प (A) को सही मान लेना क्योंकि वह प्रत्यक्ष रूप से 'महामारी' शब्द जैसा प्रतीत होता है, जबकि गद्यांश में यह शब्द सीधे प्रयुक्त नहीं है।
- 2गद्यांश के विपरीत भाव वाले विकल्प (C) 'हलकी चहल-पहल' को चुन लेना।
Interesting Facts
साहित्य में रात्रि व सन्नाटे का प्रयोग प्रायः मानवीय पीड़ा व त्रासदी को गहराई से उभारने के लिए किया जाता है।
सियार व पेचक (उल्लू) की आवाज़ों को भारतीय ग्रामीण परिवेश में परंपरागत रूप से अशुभ व भय का प्रतीक माना जाता रहा है।
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Frequently Asked Questions
गद्यांश में भयावह ध्वनियों का उल्लेख क्यों किया गया है?
ये ध्वनियाँ रात्रि की निस्तब्धता को तोड़कर गाँव में महामारी से पीड़ित लोगों की मानवीय पीड़ा को पाठक तक पहुँचाने के लिए वर्णित हैं।
क्या इस प्रश्न में 'महामारी' शब्द ही उत्तर है?
नहीं, प्रश्न भयावहपन के साहित्यिक प्रयोजन पर केंद्रित है, इसलिए 'निस्तब्धता में मानवीय पीड़ा' दर्शाने वाला विकल्प (B) अधिक सटीक है।