'सभ्यता और संस्कृति दोनों साथ-साथ चलते हैं' – कैसे ? उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए ।
'सभ्यता और संस्कृति दोनों साथ-साथ चलते हैं' – कैसे ? उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए ।
सभ्यता और संस्कृति एक-दूसरे से अलग होते हुए भी मनुष्य के हर कार्य में साथ-साथ चलती हैं।
- मकान बनाना सभ्यता है, पर उसे सुंदर ढंग से बनाने की रुचि व कला संस्कृति है।
- भोजन की सामग्री जुटाना सभ्यता है, पर उसे पकाने और खाने की कला संस्कृति है।
इस प्रकार बाहरी उन्नति (सभ्यता) और भीतरी परिष्कार (संस्कृति) सदैव साथ-साथ विकसित होते हैं।
Marking Scheme
- 11 अंक: सभ्यता व संस्कृति के साथ-साथ चलने का सही व स्पष्ट तर्क
- 21 अंक: गद्यांश-आधारित उपयुक्त उदाहरण (मकान-निर्माण/भोजन-कला)
Hint
मकान बनाना सभ्यता है, बनाने की कला संस्कृति है — हर उदाहरण में दोनों तत्व साथ खोजें।
Quick Oral Answer
सभ्यता बाहरी भौतिक उन्नति है और संस्कृति भीतरी सूक्ष्म उन्नति; दोनों हर मानव-क्रिया में साथ-साथ प्रकट होती हैं, जैसे मकान बनाना सभ्यता और उसकी रुचि संस्कृति है।
Analysis & Explanation
अवधारणा: गद्यांश के अनुसार सभ्यता मनुष्य की बाहरी, भौतिक उन्नति है जबकि संस्कृति उसकी आंतरिक, सूक्ष्म उन्नति है। दोनों भिन्न होते हुए भी परस्पर जुड़ी रहती हैं क्योंकि हर भौतिक वस्तु के निर्माण में मनुष्य की रुचि, कला और सोच अर्थात् संस्कृति अवश्य झलकती है।
परीक्षा में सावधानी: विद्यार्थी प्रायः दोनों शब्दों को पर्यायवाची मानकर घोल देते हैं; गद्यांश-आधारित ठोस उदाहरण देकर स्पष्ट अंतर दिखाना आवश्यक है, अन्यथा अंक कट सकते हैं।
वास्तविक जीवन में: आज मोटरगाड़ी, मकान व वस्त्र सभ्यता के प्रतीक हैं, परंतु उन्हें बनाने की कला, डिज़ाइन और सुरुचि हमारी संस्कृति को दर्शाती है।
Common Mistakes
- 1सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी मान लेना
- 2बिना गद्यांश-आधारित उदाहरण के केवल परिभाषा लिख देना
Interesting Facts
रामधारी सिंह 'दिनकर' ने सभ्यता व संस्कृति के अंतर पर विस्तृत विवेचन करते हुए 'संस्कृति के चार अध्याय' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा था।
यूनेस्को भी सभ्यता (भौतिक/तकनीकी विकास) और संस्कृति (मूल्य, कला, परंपरा) को भिन्न किंतु परस्पर संबंधित संकल्पनाएँ मानता है।
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Frequently Asked Questions
सभ्यता और संस्कृति में मुख्य अंतर क्या है ?
सभ्यता मनुष्य की बाहरी भौतिक उन्नति है (मकान, वस्त्र, यातायात), जबकि संस्कृति उसकी भीतरी, सूक्ष्म उन्नति है (कला, रुचि, मूल्य)।
क्या सभ्यता के बिना संस्कृति संभव है ?
नहीं, दोनों साथ-साथ चलती हैं; हर भौतिक निर्माण में मनुष्य की कलात्मक रुचि व सोच झलकती है, इसलिए एक-दूसरे के बिना अधूरी हैं।