Q6
2 marksShort AnswerSection

"संस्कृति असल में शरीर का नहीं आत्मा का गुण है ।" इस कथन को गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।

अपठित बोध (गद्यांश)
संस्कृति: आत्मा का गुण
Official Answer

इस कथन का अर्थ है कि संस्कृति मनुष्य के मन व आत्मा से जुड़ी विशेषता है, न कि शरीर से जुड़ी बाहरी वस्तु।


  • सभ्यता शरीर/बाहरी जीवन से संबंधित है — घर, वस्त्र, वाहन आदि।
  • संस्कृति आत्मा/भीतरी भाव से संबंधित है — दया, ममता, परोपकार तथा गीत-काव्य-कला से आनंद लेने की योग्यता।

अतः संस्कृति शरीर की नहीं, आत्मा की उन्नति दर्शाती है।

संस्कृतिआत्माशरीरदयाममतापरोपकारकला-बोध

Marking Scheme

  • 11 अंक: संस्कृति को आत्मा/भीतरी गुण के रूप में स्पष्ट करना
  • 21 अंक: गद्यांश से उपयुक्त संदर्भ (दया, ममता, कला-आनंद) देना

Hint

सभ्यता = शरीर/बाहरी वस्तुएँ; संस्कृति = आत्मा/भीतरी भाव — गद्यांश की इन पंक्तियों को जोड़कर लिखें।

Quick Oral Answer

संस्कृति शरीर से नहीं आत्मा से जुड़ी है क्योंकि यह दया, ममता, परोपकार और कला-बोध जैसे भीतरी गुणों से बनती है, जबकि सभ्यता बाहरी भौतिक वस्तुओं से।

Analysis & Explanation

अवधारणा: गद्यांश स्पष्ट करता है कि संस्कृति भौतिक वस्तु नहीं बल्कि मनुष्य की आंतरिक भावनाओं, संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध का परिणाम है — इसलिए इसे 'आत्मा का गुण' कहा गया है।


परीक्षा में सावधानी: विद्यार्थी संस्कृति को भी भौतिक वस्तुओं (मकान, वाहन) से जोड़ने की भूल करते हैं; उत्तर में स्पष्ट करना चाहिए कि संस्कृति भाव व कला-बोध से संबंधित है, वस्तु से नहीं।


वास्तविक जीवन में: दो व्यक्ति समान भौतिक सुविधाएँ रखते हुए भी संवेदनशीलता व कला-रुचि में भिन्न हो सकते हैं — यही अंतर संस्कृति का है।

Common Mistakes

  1. 1संस्कृति को भी भौतिक वस्तु (मकान, वाहन) से जोड़ देना
  2. 2'आत्मा का गुण' का अर्थ केवल धार्मिक संदर्भ में लिखना जबकि यहाँ भाव-संवेदनशीलता से तात्पर्य है

Interesting Facts

भारतीय चिंतन परंपरा में सदा से भौतिक उन्नति (सभ्यता) और आंतरिक मूल्यों (संस्कृति) के बीच भेद किया जाता रहा है।

कला, संगीत व साहित्य के प्रति रुचि को मनोविज्ञान में भी 'भावनात्मक बुद्धि' (Emotional Intelligence) से जोड़ा जाता है, जो संस्कृति के आत्मपरक स्वरूप से मेल खाता है।

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Frequently Asked Questions

संस्कृति को 'आत्मा का गुण' क्यों कहा गया है ?

क्योंकि संस्कृति भौतिक वस्तु नहीं बल्कि दया, ममता, परोपकार व कला-बोध जैसी आंतरिक भावनाओं से जुड़ी है, जो मनुष्य की आत्मा/मन से उपजती हैं।

सभ्यता को शरीर का गुण क्यों माना गया है ?

क्योंकि सभ्यता मकान, वस्त्र, वाहन जैसी बाहरी, भौतिक और शरीर-संबंधी सुविधाओं से जुड़ी है, जिसे देखा-छुआ जा सकता है।