"संस्कृति असल में शरीर का नहीं आत्मा का गुण है ।" इस कथन को गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
"संस्कृति असल में शरीर का नहीं आत्मा का गुण है ।" इस कथन को गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
इस कथन का अर्थ है कि संस्कृति मनुष्य के मन व आत्मा से जुड़ी विशेषता है, न कि शरीर से जुड़ी बाहरी वस्तु।
- सभ्यता शरीर/बाहरी जीवन से संबंधित है — घर, वस्त्र, वाहन आदि।
- संस्कृति आत्मा/भीतरी भाव से संबंधित है — दया, ममता, परोपकार तथा गीत-काव्य-कला से आनंद लेने की योग्यता।
अतः संस्कृति शरीर की नहीं, आत्मा की उन्नति दर्शाती है।
Marking Scheme
- 11 अंक: संस्कृति को आत्मा/भीतरी गुण के रूप में स्पष्ट करना
- 21 अंक: गद्यांश से उपयुक्त संदर्भ (दया, ममता, कला-आनंद) देना
Hint
सभ्यता = शरीर/बाहरी वस्तुएँ; संस्कृति = आत्मा/भीतरी भाव — गद्यांश की इन पंक्तियों को जोड़कर लिखें।
Quick Oral Answer
संस्कृति शरीर से नहीं आत्मा से जुड़ी है क्योंकि यह दया, ममता, परोपकार और कला-बोध जैसे भीतरी गुणों से बनती है, जबकि सभ्यता बाहरी भौतिक वस्तुओं से।
Analysis & Explanation
अवधारणा: गद्यांश स्पष्ट करता है कि संस्कृति भौतिक वस्तु नहीं बल्कि मनुष्य की आंतरिक भावनाओं, संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध का परिणाम है — इसलिए इसे 'आत्मा का गुण' कहा गया है।
परीक्षा में सावधानी: विद्यार्थी संस्कृति को भी भौतिक वस्तुओं (मकान, वाहन) से जोड़ने की भूल करते हैं; उत्तर में स्पष्ट करना चाहिए कि संस्कृति भाव व कला-बोध से संबंधित है, वस्तु से नहीं।
वास्तविक जीवन में: दो व्यक्ति समान भौतिक सुविधाएँ रखते हुए भी संवेदनशीलता व कला-रुचि में भिन्न हो सकते हैं — यही अंतर संस्कृति का है।
Common Mistakes
- 1संस्कृति को भी भौतिक वस्तु (मकान, वाहन) से जोड़ देना
- 2'आत्मा का गुण' का अर्थ केवल धार्मिक संदर्भ में लिखना जबकि यहाँ भाव-संवेदनशीलता से तात्पर्य है
Interesting Facts
भारतीय चिंतन परंपरा में सदा से भौतिक उन्नति (सभ्यता) और आंतरिक मूल्यों (संस्कृति) के बीच भेद किया जाता रहा है।
कला, संगीत व साहित्य के प्रति रुचि को मनोविज्ञान में भी 'भावनात्मक बुद्धि' (Emotional Intelligence) से जोड़ा जाता है, जो संस्कृति के आत्मपरक स्वरूप से मेल खाता है।
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Frequently Asked Questions
संस्कृति को 'आत्मा का गुण' क्यों कहा गया है ?
क्योंकि संस्कृति भौतिक वस्तु नहीं बल्कि दया, ममता, परोपकार व कला-बोध जैसी आंतरिक भावनाओं से जुड़ी है, जो मनुष्य की आत्मा/मन से उपजती हैं।
सभ्यता को शरीर का गुण क्यों माना गया है ?
क्योंकि सभ्यता मकान, वस्त्र, वाहन जैसी बाहरी, भौतिक और शरीर-संबंधी सुविधाओं से जुड़ी है, जिसे देखा-छुआ जा सकता है।