अँधेरी रात चुपचाप आँसू क्यों बहा रही थी ?
अँधेरी रात चुपचाप आँसू क्यों बहा रही थी ?
Options
सही विकल्प (C) महामारी के कारण गाँव वालों की असहाय स्थिति से दुखी होने के कारण है।
लेखक ने रात्रि का मानवीकरण करते हुए दिखाया है कि महामारी की चपेट में असहाय गाँव वालों की पीड़ा देखकर मानो रात्रि स्वयं चुपचाप आँसू बहा रही थी।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (C) चुनने पर पूर्ण अंक ।
Hint
रात्रि का मानवीकरण किस मानवीय पीड़ा की ओर संकेत करता है, यह सोचें।
Quick Oral Answer
रात्रि का मानवीकरण महामारी से त्रस्त गाँव वालों की असहाय पीड़ा को दर्शाने के लिए किया गया है।
Analysis & Explanation
प्रसंग: यह अंश फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'पहलवान की ढोलक' से लिया गया है, जिसमें महामारी (हैजा) के दौरान गाँव के भयावह वातावरण का वर्णन है।
व्याख्या: लेखक ने प्रकृति का मानवीकरण करते हुए रात्रि को दुखी और असहाय दिखाया है — यह गाँव वालों की महामारी-जनित पीड़ा और असहायता का प्रतीकात्मक चित्रण है, न कि रात्रि का कोई स्वतंत्र दुख।
विकल्पों का विश्लेषण:
- (A) जंगली पशुओं की आवाज़ का प्रसंग से कोई सीधा संबंध नहीं।
- (B) 'प्रकृति की असमर्थता' सामान्यीकृत कथन है, वास्तविक कारण (महामारी) को इंगित नहीं करता।
- (D) भय केवल अंधकार-सन्नाटे से नहीं, बल्कि मानवीय पीड़ा से उपजा है।
परीक्षा टिप: मानवीकरण अलंकार वाले प्रश्नों में यह देखें कि प्रकृति का भाव किस मानवीय स्थिति का प्रतीक है।
Common Mistakes
- 1मानवीकरण अलंकार को न पहचानकर रात्रि के 'आँसू' को शाब्दिक अर्थ में लेना।
- 2प्रसंग में वर्णित महामारी के प्रभाव को नज़रअंदाज़ कर सामान्य भय (जंगली पशु/अंधकार) को कारण मान लेना।
Interesting Facts
फणीश्वरनाथ रेणु (1921-1977) हिंदी के 'आंचलिक उपन्यास' परंपरा के प्रवर्तक माने जाते हैं, जिनका प्रसिद्ध उपन्यास 'मैला आँचल' ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण करता है।
'पहलवान की ढोलक' कहानी में ढोलक की थाप को गाँव के संघर्ष और जिजीविषा के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है।
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Frequently Asked Questions
'पहलवान की ढोलक' के लेखक कौन हैं ?
इस कहानी के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु हैं, जो आंचलिक कथा-साहित्य के लिए प्रसिद्ध हैं।
इस अंश में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है ?
इस अंश में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ है, जिसमें रात्रि को मनुष्य की तरह आँसू बहाते दिखाया गया है।