Question 122 marksShort AnswerSection क

नदी में पड़ते आकाश के प्रतिबिंब के बारे में कवि ने क्या कल्पना की है ? स्पष्ट कीजिए ।

अपठित बोध (गद्यांश)
अपठित काव्यांश — कल्पना और बिंब-योजना

Official answer

कवि की कल्पना के अनुसार, निर्मल (स्वच्छ) आकाश जब नदी के जल में प्रतिबिंबित होता है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वह शिव के नंदी (बैल) के समान नदिका का जल पी रहा हो। साथ ही, वह प्रतिबिंबित आकाश पृथ्वी (अवनी) के ऊपर मानो मंत्रमुग्ध, स्थिर और अचेत-सा खड़ा हो — जैसे नंदी शिव के समक्ष श्रद्धाभाव से स्थिर खड़ा रहता है। इस प्रकार कवि आकाश के जल-प्रतिबिंब को भक्ति, पवित्रता और शांत स्थिरता के भाव से जोड़ता है।

Answer keywords:आकाश प्रतिबिंबशिव के नंदीनिर्मल नभबिसुधजल पीनाकल्पनाभक्तिभाव

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: आकाश के प्रतिबिंब की नंदी से तुलना बताने पर।
  2. 2.1 अंक: 'बिसुध/स्थिर खड़ा होना' के भाव — भक्ति/तल्लीनता/पवित्रता — का स्पष्टीकरण देने पर।

Hint

जल पीते नंदी की मुद्रा से आकाश के प्रतिबिंब की तुलना पर ध्यान दें, तथा 'बिसुध' शब्द के भाव को भी जोड़ें।

Quick oral answer

कवि की कल्पना है कि निर्मल आकाश का प्रतिबिंब नदी में ऐसे दिखता है मानो शिव का नंदी जल पी रहा हो, और आकाश धरती के ऊपर भक्तिभाव में स्थिर, तल्लीन खड़ा है।

Common mistakes

  1. 1.केवल 'आकाश नदी में दिखता है' जैसा सामान्य कथन लिखना, नंदी की विशिष्ट उपमा का उल्लेख न करना।
  2. 2.'बिसुध' शब्द के भाव (तल्लीनता/स्थिरता) को छोड़कर केवल शाब्दिक अनुवाद कर देना, जिससे भावार्थ अधूरा रह जाता है।

Analysis and explanation

संदर्भ पंक्तियाँ: "शिव के नंदी-सा पानी पीता नदिका में, निर्मल नभ अवनी के ऊपर बिसुध खड़ा है।"


कल्पना का विश्लेषण

  • नदी में पड़ता आकाश का प्रतिबिंब देखकर कवि को लगता है कि आकाश स्वयं झुककर नदी का जल पी रहा है — ठीक वैसे ही जैसे भगवान शिव का वाहन 'नंदी' (बैल) जल पीता है।
  • 'बिसुध' शब्द अचेत/तल्लीन अवस्था का बोध कराता है — मानो आकाश धरती के ऊपर भक्ति-भाव में लीन, स्थिर खड़ा है।

काव्य-सौंदर्य: यह उपमा प्रकृति के एक साधारण दृश्य (आकाश का जल में प्रतिबिंब) को धार्मिक-पौराणिक बिंब (शिव-नंदी) से जोड़कर उसे पवित्रता, शांति और भक्तिभाव का प्रतीक बना देती है, जिससे संपूर्ण ग्राम्य-प्रकृति दृश्य में एक आध्यात्मिक गरिमा जुड़ जाती है।


परीक्षा-सुझाव: ऐसे 'कल्पना स्पष्ट कीजिए' प्रश्नों में मूल उपमा (नंदी) बताने के साथ-साथ उसके भाव (स्थिरता/भक्ति/पवित्रता) का भी उल्लेख अवश्य करें, तभी पूरे अंक मिलते हैं।

Interesting facts

नंदी को शिव-भक्ति और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, जो सदैव शिव के समक्ष स्थिर खड़ा रहता है — यही भाव यहाँ आकाश की स्थिरता में आरोपित किया गया है।

जल में आकाश के प्रतिबिंब को पौराणिक बिंबों से जोड़ना हिंदी की छायावादोत्तर काव्य-परंपरा की विशेषता रही है, जिससे प्रकृति-चित्रण में आध्यात्मिक गहराई आती है।

Question details

Q12 of 31 questions

Board
CBSE
Class
Class 12
Subject
Hindi Core
Year
2026
Section
Section क
Marks
2
Type
Short Answer
Chapter
अपठित बोध (गद्यांश)
Topic
अपठित काव्यांश — कल्पना और बिंब-योजना
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
अपठित बोध: पद्यांश-आधारित लघु प्रश्न (आकाश-प्रतिबिंब की कल्पना)
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

Spotted a mistake or something unclear?

Tell us and we will fix it.

Frequently asked questions

आकाश के प्रतिबिंब की तुलना नंदी से ही क्यों की गई ?

नंदी शिव-भक्ति, श्रद्धा और स्थिरता का प्रतीक है; जल पीते नंदी की मुद्रा आकाश के जल में झुके हुए प्रतिबिंब से साम्य रखती है, इसलिए यह उपमा भावपूर्ण और सटीक बन पड़ी है।

'बिसुध' शब्द का यहाँ क्या भावार्थ है ?

'बिसुध' का अर्थ है अचेत/तल्लीन — यहाँ यह आकाश की भक्तिपूर्ण तल्लीनता और स्थिरता को दर्शाता है, मानो वह धरती के ऊपर मंत्रमुग्ध खड़ा हो।