Q50
2 marksShort AnswerSection

'मनुष्यता' कविता में कवि मनुष्य को मृत्यु से भयभीत न होने की सलाह क्यों दे रहा है ?

अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
मनुष्यता — मृत्यु से निर्भयता की सलाह
Official Answer

मृत्यु अनिवार्य है: कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी को मरना निश्चित है, अतः मृत्यु से भयभीत होना व्यर्थ है।

सुमृत्यु का महत्व: महत्वपूर्ण यह है कि जीवन कैसे जिया गया — यदि जीवन परोपकार व त्याग में बीते (जैसे दधीचि, कर्ण, रंतिदेव), तो ऐसी मृत्यु 'सुमृत्यु' कहलाती है और व्यक्ति मरकर भी अमर हो जाता है। इसीलिए कवि मृत्यु के भय में जीने के बजाय उदार, परहितकारी जीवन जीने की सलाह देता है।

मनुष्यतामैथिलीशरण गुप्तसुमृत्युपरोपकारदधीचिकर्णरंतिदेव

Marking Scheme

  • 11 अंक: मृत्यु की अनिवार्यता और उससे भय व्यर्थ होने का उल्लेख।
  • 21 अंक: सुमृत्यु/परोपकारी जीवन का महत्व, उदाहरण सहित (दधीचि/कर्ण/रंतिदेव में से कोई एक)।

Hint

दधीचि, कर्ण, रंतिदेव के त्याग के उदाहरण देकर 'सुमृत्यु' की अवधारणा स्पष्ट करें।

Quick Oral Answer

कवि कहते हैं मृत्यु निश्चित है, इसलिए उससे डरने के बजाय परोपकारी जीवन जीना चाहिए ताकि मृत्यु 'सुमृत्यु' बने।

Analysis & Explanation

'मनुष्यता' कविता में मैथिलीशरण गुप्त उदारता, करुणा और परोपकार को मानवता का सर्वोच्च गुण मानते हुए मृत्यु के भय से ऊपर उठने का संदेश देते हैं।


मूल भाव

  • पंक्ति: 'मरण वह, जो जगावे जीवितों में मृत्युंजयता' — सच्ची मृत्यु वह है जो जीवित लोगों में भी अमरता की भावना जगा दे।
  • उदाहरण — दधीचि (हड्डियाँ दान), कर्ण (कवच-कुंडल दान), रंतिदेव (भूखे को भोजन दान) — परहित में दिया गया जीवन ही सार्थक होता है।
  • मृत्यु अवश्यंभावी है, इसलिए उससे डरकर स्वार्थी जीवन जीना व्यर्थ है; उदारतापूर्वक मानवता की सेवा करते हुए जीना श्रेष्ठ है।

परीक्षा में सावधानी

  • विद्यार्थी अक्सर केवल 'मृत्यु निश्चित है' तक सीमित रह जाते हैं।
  • पूर्ण अंक के लिए सुमृत्यु के उदाहरण (दधीचि/कर्ण/रंतिदेव) और उदार जीवन जीने की सीख भी लिखना आवश्यक है।

वास्तविक जीवन में

  • समाजसेवा और परोपकार से जुड़े लोग आज भी 'अमर' कहे जाते हैं, चाहे वे शारीरिक रूप से न रहें।

Common Mistakes

  1. 1केवल 'मृत्यु निश्चित है' लिखकर रुक जाना, सुमृत्यु के उदाहरण न देना।
  2. 2रंतिदेव, दधीचि, कर्ण के प्रसंगों को आपस में मिला देना।

Interesting Facts

'मनुष्यता' कविता खड़ी बोली में सवैया शैली में रचित है और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्धतम रचनाओं में से एक है।

मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी गई थी और उन्हें 1952 में राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया था।

दधीचि मुनि की कथा के अनुसार उनकी हड्डियों से बना वज्र प्रयोग कर देवताओं ने वृत्रासुर का वध किया था।

Spotted a mistake or something unclear?

Tell us — we fix reported answers fast.

Frequently Asked Questions

मनुष्यता कविता के कवि कौन हैं?

मैथिलीशरण गुप्त, जिन्हें 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है।

सुमृत्यु से कवि का क्या तात्पर्य है?

सुमृत्यु वह मृत्यु है जो परोपकार और त्याग से भरे जीवन के बाद आती है और व्यक्ति को अमर बना देती है।