'महात्मा' शब्द का बहुव्रीहि समास में विग्रह कीजिए।
'महात्मा' शब्द का बहुव्रीहि समास में विग्रह कीजिए।
Official answer
'महात्मा' का बहुव्रीहि विग्रह है — 'महान् है आत्मा जिसकी (वह पुरुष)'।
यहाँ न 'महान्' प्रधान है न 'आत्मा', बल्कि अर्थ किसी तीसरे (महापुरुष) की ओर संकेत करता है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।
Marking scheme
- 1.1 अंक: सही विग्रह 'महान् है आत्मा जिसकी (वह पुरुष)' लिखने पर पूर्ण अंक।
- 2.'महान् आत्मा वाला व्यक्ति' जैसा समानार्थी सही विग्रह भी स्वीकार्य है।
Hint
बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता; अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु की ओर संकेत करता है — जैसे 'महात्मा' का अर्थ है 'महान् आत्मा वाला व्यक्ति'।
Quick oral answer
'महात्मा' का विग्रह है 'महान् है आत्मा जिसकी' — चूँकि अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति की ओर संकेत करता है, न कि स्वयं 'महान्' या 'आत्मा' शब्द की ओर, इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।
Common mistakes
- 1.'महात्मा' को कर्मधारय समास (महान् है जो आत्मा) समझ लेना, जबकि यहाँ अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति (महापुरुष) की ओर संकेत करता है।
- 2.विग्रह करते समय 'जिसकी' या 'वह पुरुष' जैसे संकेत-सूचक अंश को छोड़ देना, जो बहुव्रीहि समास की पहचान के लिए आवश्यक है।
Analysis and explanation
'महात्मा' बहुव्रीहि समास का उदाहरण है क्योंकि इसका अर्थ किसी तीसरे पद (व्यक्ति) की ओर संकेत करता है, न कि स्वयं 'महान्' या 'आत्मा' की ओर।
संकल्पना (बहुव्रीहि समास)
- बहुव्रीहि समास में न पूर्व पद प्रधान होता है, न उत्तर पद — दोनों मिलकर किसी तीसरे ही अर्थ (व्यक्ति, वस्तु या विशेषता) की ओर संकेत करते हैं।
- यह इसे कर्मधारय समास से अलग करता है, जहाँ पद स्वयं अपने शाब्दिक अर्थ में प्रधान बना रहता है।
'महात्मा' पर लागू करना
- 'महात्मा' = 'महान्' (विशेषण) + 'आत्मा' (संज्ञा), परंतु अर्थ न केवल 'महान्' है, न केवल 'आत्मा'।
- अर्थ है 'वह व्यक्ति जिसकी आत्मा महान् हो' — यानी कोई तीसरा पद (व्यक्ति-विशेष) ही प्रधान बनकर उभरता है।
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी प्रायः इसे तत्पुरुष या कर्मधारय समझ बैठते हैं क्योंकि शब्द-रचना ऊपर से मिलती-जुलती लगती है।
- विग्रह करते समय जब भाव किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु की ओर इशारा करे, तभी उसे बहुव्रीहि समास मानें।
वास्तविक जीवन में
- 'दशानन' (दस हैं आनन जिसके, अर्थात रावण), 'पंकज' (कीचड़ में जन्मा, अर्थात कमल), 'चतुर्भुज' (चार भुजाएँ हैं जिसकी, अर्थात विष्णु) — सभी बहुव्रीहि समास के प्रचलित उदाहरण हैं।
Interesting facts
'बहुव्रीहि' शब्द स्वयं भी बहुव्रीहि समास का उदाहरण है — 'बहु व्रीहि (चावल) हैं जिसके पास' अर्थात धनी व्यक्ति।
रामायण और महाभारत में प्रयुक्त कई नाम बहुव्रीहि समास पर आधारित हैं, जैसे 'दशानन' (रावण) और 'पीतांबर' (कृष्ण)।
Question details
Q26 of 66 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course B
- Year
- 2026
- Section
- Section ख
- Marks
- 1
- Type
- Very Short Answer
- Chapter
- अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
- Topic
- समास - बहुव्रीहि समास
- Bloom's level
- apply
- Syllabus topic
- व्याकरण: समास — बहुव्रीहि समास (विग्रह)
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
बहुव्रीहि समास की पहचान कैसे करें?
जब समस्त पद में कोई भी पद प्रधान न होकर अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करे, तब वह बहुव्रीहि समास कहलाता है, जैसे 'महात्मा' = महान् आत्मा वाला व्यक्ति।
बहुव्रीहि और कर्मधारय समास में क्या अंतर है?
कर्मधारय समास में उत्तर पद प्रधान होता है और पूर्व पद उसकी विशेषता बताता है (जैसे नीलकमल), जबकि बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता, अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु की ओर संकेत करता है (जैसे महात्मा)।