Question 451 markMCQSection ग

काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा सामंजस्य स्थापित करती हैं :

अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
मीराबाई का भक्ति पद - दर्शन, स्मरण और भक्ति का सामंजस्य

Options

(क)त्याग, भक्ति और विनय का
(ख)दर्शन, स्मरण और भक्ति का
(ग)प्रेम, उपालंभ और दर्शन का
(घ)सम्मान, प्रेम और भक्ति का

Official answer

ख) दर्शन, स्मरण और भक्ति का

"चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी" पंक्ति से स्पष्ट है कि मीरा प्रभु-सेवा में इन तीनों - दर्शन, स्मरण (नाम-स्मरण) और भाव-भक्ति - के बीच सुंदर सामंजस्य स्थापित करती हैं।

Answer keywords:दर्शनसुमरणभाव-भक्तितीनूं बाताँसामंजस्य

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: सही विकल्प (ख) चुनने पर पूर्ण अंक।
  2. 2.आंशिक अंक की व्यवस्था नहीं - MCQ में या तो पूर्ण अंक या शून्य।

Hint

'चाकरी में दरसण, खरची में सुमरण और जागीर में भाव-भक्ति' - इन तीन शब्दों को खोजें, यही 'तीनूं बाताँ' हैं।

Quick oral answer

मीरा प्रभु-सेवा में दर्शन, स्मरण और भक्ति - इन तीनों तत्वों के बीच सुंदर सामंजस्य स्थापित करती हैं, जैसा कि 'तीनूं बाताँ सरसी' पंक्ति से स्पष्ट है।

Common mistakes

  1. 1.'उपालंभ' और 'त्याग' जैसे शब्दों को काव्यांश में मान लेना, जबकि वे इस अंश में उल्लिखित ही नहीं हैं।
  2. 2.'तीनूं बाताँ सरसी' पंक्ति को ध्यान से न पढ़ने के कारण तीन तत्वों (दर्शन, स्मरण, भक्ति) को सही ढंग से न पहचान पाना।

Analysis and explanation

काव्यांश की पंक्ति 'चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी' में मीरा तीन बातों का उल्लेख करती हैं।


सही उत्तर का आधार

  • चाकरी के बदले 'दर्शन', खरची के रूप में 'सुमरण' (नाम-स्मरण), और जागीर के रूप में 'भाव-भक्ति'।
  • 'तीनूं बाताँ सरसी' का अर्थ है कि ये तीनों इच्छाएँ पूर्ण/सफल होंगी - अतः मीरा दर्शन, स्मरण और भक्ति के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।

अन्य विकल्पों का खंडन

  • 'त्याग और विनय' शब्द काव्यांश में कहीं प्रत्यक्ष रूप से नहीं आए।
  • 'उपालंभ' (शिकायत/उलाहना) का कोई भाव इस अंश में नहीं है; यह मीरा के अन्य पदों से संबंधित भाव है, इस काव्यांश से नहीं।
  • 'सम्मान' शब्द भी काव्यांश में उल्लिखित नहीं है।

निष्कर्ष

  • केवल विकल्प (ख) ही काव्यांश की मूल पंक्तियों से प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध होता है।

Interesting facts

'खरची' शब्द राजस्थानी बोली का है जिसका अर्थ 'जेब-खर्च' या 'दैनिक व्यय के लिए दी जाने वाली राशि' होता है।

'जागीर' मध्यकाल में भूमि अनुदान को कहते थे; मीरा इसे रूपक के रूप में प्रयोग करते हुए 'भाव-भक्ति' को अपनी जागीर मानती हैं।

Question details

Q45 of 66 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course B
Year
2026
Section
Section ग
Marks
1
Type
MCQ
Chapter
अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
Topic
मीराबाई का भक्ति पद - दर्शन, स्मरण और भक्ति का सामंजस्य
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
खंड ग: अपठित बोध - काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न 9(ii)
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

'तीनूं बाताँ सरसी' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति - ये तीनों इच्छाएँ पूर्ण/सफल होंगी।