काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा सामंजस्य स्थापित करती हैं :
काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा सामंजस्य स्थापित करती हैं :
Options
ख) दर्शन, स्मरण और भक्ति का
"चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी" पंक्ति से स्पष्ट है कि मीरा प्रभु-सेवा में इन तीनों - दर्शन, स्मरण (नाम-स्मरण) और भाव-भक्ति - के बीच सुंदर सामंजस्य स्थापित करती हैं।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (ख) चुनने पर पूर्ण अंक।
- 2आंशिक अंक की व्यवस्था नहीं - MCQ में या तो पूर्ण अंक या शून्य।
Hint
'चाकरी में दरसण, खरची में सुमरण और जागीर में भाव-भक्ति' - इन तीन शब्दों को खोजें, यही 'तीनूं बाताँ' हैं।
Quick Oral Answer
मीरा प्रभु-सेवा में दर्शन, स्मरण और भक्ति - इन तीनों तत्वों के बीच सुंदर सामंजस्य स्थापित करती हैं, जैसा कि 'तीनूं बाताँ सरसी' पंक्ति से स्पष्ट है।
Analysis & Explanation
काव्यांश की पंक्ति 'चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी' में मीरा तीन बातों का उल्लेख करती हैं।
सही उत्तर का आधार
- चाकरी के बदले 'दर्शन', खरची के रूप में 'सुमरण' (नाम-स्मरण), और जागीर के रूप में 'भाव-भक्ति'।
- 'तीनूं बाताँ सरसी' का अर्थ है कि ये तीनों इच्छाएँ पूर्ण/सफल होंगी - अतः मीरा दर्शन, स्मरण और भक्ति के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।
अन्य विकल्पों का खंडन
- 'त्याग और विनय' शब्द काव्यांश में कहीं प्रत्यक्ष रूप से नहीं आए।
- 'उपालंभ' (शिकायत/उलाहना) का कोई भाव इस अंश में नहीं है; यह मीरा के अन्य पदों से संबंधित भाव है, इस काव्यांश से नहीं।
- 'सम्मान' शब्द भी काव्यांश में उल्लिखित नहीं है।
निष्कर्ष
- केवल विकल्प (ख) ही काव्यांश की मूल पंक्तियों से प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध होता है।
Common Mistakes
- 1'उपालंभ' और 'त्याग' जैसे शब्दों को काव्यांश में मान लेना, जबकि वे इस अंश में उल्लिखित ही नहीं हैं।
- 2'तीनूं बाताँ सरसी' पंक्ति को ध्यान से न पढ़ने के कारण तीन तत्वों (दर्शन, स्मरण, भक्ति) को सही ढंग से न पहचान पाना।
Interesting Facts
'खरची' शब्द राजस्थानी बोली का है जिसका अर्थ 'जेब-खर्च' या 'दैनिक व्यय के लिए दी जाने वाली राशि' होता है।
'जागीर' मध्यकाल में भूमि अनुदान को कहते थे; मीरा इसे रूपक के रूप में प्रयोग करते हुए 'भाव-भक्ति' को अपनी जागीर मानती हैं।
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Frequently Asked Questions
'तीनूं बाताँ सरसी' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति - ये तीनों इच्छाएँ पूर्ण/सफल होंगी।