Q65
5 marksLong AnswerSection

'सबसे बड़ा कौन' विषय पर लगभग 100 शब्दों में लघुकथा लिखिए।

लेखन कौशल – सूचना लेखन (CBSE हिंदी 'ब' रचनात्मक लेखन खंड)
लघुकथा लेखन – 'सबसे बड़ा कौन'
Official Answer

सबसे बड़ा कौन


एक बार शरीर के अंग — आँख, नाक, कान, हाथ और हृदय — आपस में झगड़ने लगे कि उनमें सबसे बड़ा कौन है। आँख बोली, "मेरे बिना कुछ भी दिखाई नहीं देता, इसलिए मैं सबसे बड़ी हूँ।" नाक बोली, "मेरे बिना साँस लेना असंभव है।" कान बोले, "मेरे बिना सुनना कैसे होगा?" हाथ बोला, "मेरे बिना कोई भी काम संभव नहीं, अतः मैं श्रेष्ठ हूँ।" सब अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने में जुटे रहे, केवल हृदय चुपचाप सुनता रहा।


तभी शरीर का स्वामी अचानक बीमार पड़ गया और हृदय की धड़कन धीमी होने लगी। यह देखते ही आँख को कुछ दिखना बंद हो गया, कान सुनना भूल गए और हाथ निष्क्रिय हो गए। सबको एहसास हुआ कि हृदय के बिना उनका कोई अस्तित्व ही नहीं। सभी अंगों ने अपनी भूल स्वीकार की और मिलकर, एकता से काम करने का संकल्प लिया।


शिक्षा: श्रेष्ठता की होड़ व्यर्थ है; समाज के हर व्यक्ति/तत्व का योगदान अनमोल है और सबकी एकता में ही सच्ची शक्ति निहित है।

लघुकथासबसे बड़ा कौनअहंकारएकतामानवीकरणशिक्षा/संदेशहृदयसहयोग

Marking Scheme

  • 11 अंक: उपयुक्त शीर्षक तथा कथा का सुव्यवस्थित आरंभ।
  • 22 अंक: मौलिक व रोचक कथानक जो विषय ('सबसे बड़ा कौन') के अनुरूप हो, स्पष्ट मोड़/संघर्ष सहित।
  • 31 अंक: सरल, प्रवाहपूर्ण व शुद्ध भाषा-शैली, लगभग 100 शब्दों की सीमा का पालन।
  • 41 अंक: कथा के अंत में स्पष्ट व सारगर्भित शिक्षा/नैतिक संदेश।

Hint

कथा को शीर्षक, स्पष्ट कथानक (पात्रों का झगड़ा), एक मोड़ (संकट) और अंत में स्पष्ट शिक्षा/संदेश के साथ लगभग 100 शब्दों में लिखें।

Quick Oral Answer

यह लघुकथा शरीर के अंगों के आपसी झगड़े के माध्यम से यह सिखाती है कि श्रेष्ठता की होड़ व्यर्थ है और समाज में हर व्यक्ति/तत्व का योगदान महत्वपूर्ण है, तथा एकता में ही सच्ची शक्ति है।

Analysis & Explanation

लघुकथा एक संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली कथा-विधा है जिसमें कम शब्दों में गहरी सीख या संदेश दिया जाता है।


अवधारणा

  • 'सबसे बड़ा कौन' विषय पारंपरिक रूप से अहंकार, प्रतिस्पर्धा और एकता के महत्व को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है
  • शरीर के विभिन्न अंगों के मानवीकरण (personification) के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि समाज/संगठन में प्रत्येक सदस्य/तत्व का अपना विशिष्ट महत्व होता है, और श्रेष्ठता की होड़ के बजाय आपसी सहयोग ही सफलता की कुंजी है

आवश्यक तत्व

  • आरंभ, मध्य (संघर्ष/मोड़) और अंत (शिक्षा/संदेश) का स्पष्ट क्रम
  • सरल, रोचक व प्रवाहपूर्ण भाषा
  • शब्द-सीमा (लगभग 100 शब्द) का पालन — न बहुत छोटी, न बहुत लंबी

परीक्षा में सावधानी

  • विद्यार्थी प्रायः कथा को बिना किसी स्पष्ट मोड़ (twist) या शिक्षा के लिख देते हैं, जिससे कथा प्रभावहीन हो जाती है

वास्तविक जीवन में

  • यह विषय टीमवर्क, सहयोग और विविधता में एकता जैसे मूल्यों को सिखाने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है

Common Mistakes

  1. 1कथा में स्पष्ट शीर्षक व अंत में नैतिक शिक्षा न देना, जिससे लघुकथा अधूरी लगती है।
  2. 2कथानक को बहुत लंबा खींच देना, जिससे शब्द-सीमा (100 शब्द) का उल्लंघन होता है।
  3. 3विषय ('सबसे बड़ा कौन') से भटककर असंबद्ध कथा लिख देना।

Interesting Facts

लघुकथा हिंदी साहित्य की एक विशिष्ट विधा है जो अपनी संक्षिप्तता व मार्मिकता के लिए जानी जाती है; प्रेमचंद, विष्णु प्रभाकर जैसे लेखकों ने इस विधा को समृद्ध किया।

'सबसे बड़ा कौन' जैसी दृष्टान्त-कथाएँ पंचतंत्र व हितोपदेश की परंपरा से प्रेरित हैं, जहाँ पशु-पक्षियों या अंगों के माध्यम से नैतिक शिक्षा दी जाती थी।

मानव हृदय प्रतिदिन लगभग 1 लाख बार धड़कता है और लगभग 7,500 लीटर रक्त पंप करता है — यह वैज्ञानिक तथ्य भी हृदय के महत्व को रेखांकित करता है।

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Frequently Asked Questions

लघुकथा और कहानी में क्या अंतर है?

लघुकथा आकार में बहुत छोटी (100-150 शब्द) होती है और एक ही केंद्रीय विचार/संदेश पर केंद्रित होती है, जबकि कहानी विस्तृत होती है और उसमें कई घटनाक्रम व चरित्र-विकास होता है।

'सबसे बड़ा कौन' विषय पर और कौन-सी कथाएँ लिखी जा सकती हैं?

पशु-पक्षियों (जैसे शेर, हाथी, चींटी) के बीच श्रेष्ठता की बहस, या प्रकृति के तत्वों (सूरज, हवा, पानी) के बीच संवाद के रूप में भी यह विषय लिखा जा सकता है।

लघुकथा में शीर्षक देना क्यों आवश्यक है?

शीर्षक कथा के केंद्रीय भाव को संक्षेप में दर्शाता है और पाठक का ध्यान आकर्षित करता है, इसलिए परीक्षा में शीर्षक देना अंकों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।