अथवा
पुस्तकालय अध्यक्षा/अध्यक्ष तनुजा/तनुज की ओर से विद्यालय के पुस्तकालय के लिए कुछ पुस्तकें मँगवाने हेतु 'अ ब स पुस्तक भंडार', दिल्ली को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए।
अथवा
पुस्तकालय अध्यक्षा/अध्यक्ष तनुजा/तनुज की ओर से विद्यालय के पुस्तकालय के लिए कुछ पुस्तकें मँगवाने हेतु 'अ ब स पुस्तक भंडार', दिल्ली को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए।
Official answer
प्रति: absbookstore@example.com
विषय: पुस्तकालय हेतु पुस्तकें मँगवाने बारे में
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय के लिए कुछ नई पुस्तकों की आवश्यकता है। कृपया निम्नलिखित पुस्तकों की 20-20 प्रतियाँ शीघ्र भिजवाने की कृपा करें:
- हिंदी व्याकरण एवं रचना
- सामान्य ज्ञान 2026
- विज्ञान की रोचक कहानियाँ
पुस्तकों का भुगतान चेक द्वारा किया जाएगा। कृपया एक सप्ताह के भीतर पुस्तकें विद्यालय के पते पर भिजवाने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
भवदीया,
तनुजा
पुस्तकालय अध्यक्षा
Marking scheme
- 1.1 अंक: सही ई-मेल प्रारूप – 'प्रति', 'विषय' पंक्ति, उचित संबोधन (महोदय)।
- 2.2 अंक: विषय-वस्तु – आवश्यक पुस्तकों की सूची व संख्या, भुगतान विधि तथा डिलीवरी की समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख।
- 3.1 अंक: भाषा शुद्धता, संक्षिप्तता तथा लगभग 80 शब्दों की सीमा का पालन।
- 4.1 अंक: अंत में उचित समापन (धन्यवाद/भवदीया) तथा नाम-पद (तनुजा, पुस्तकालय अध्यक्षा) का सही उल्लेख।
Hint
'प्रति' व 'विषय' पंक्ति से आरंभ करें, संबोधन (महोदय) के बाद पुस्तकों की सूची, प्रतियों की संख्या, भुगतान व समय-सीमा स्पष्ट लिखें, अंत में नाम-पद सहित हस्ताक्षर करें।
Quick oral answer
यह ई-मेल पुस्तकालय अध्यक्षा तनुजा की ओर से 'अ ब स पुस्तक भंडार' को लिखी गई है, जिसमें आवश्यक पुस्तकों की सूची, संख्या, भुगतान-विधि व डिलीवरी की समय-सीमा स्पष्ट रूप से बताई गई है।
Common mistakes
- 1.ई-मेल में अनावश्यक रूप से पत्र की तरह 'सेवा में/पता' जोड़ देना, जबकि ई-मेल में केवल 'प्रति' व 'विषय' पंक्ति पर्याप्त है।
- 2.पुस्तकों की सूची, संख्या या भुगतान-विधि जैसे आवश्यक विवरण छोड़ देना।
- 3.शब्द-सीमा (लगभग 80 शब्द) से बहुत अधिक लंबा या छोटा लिख देना।
Analysis and explanation
ई-मेल लेखन आधुनिक औपचारिक संप्रेषण का महत्वपूर्ण माध्यम है और CBSE हिंदी 'ब' के रचनात्मक लेखन खंड में इसे विशेष स्थान दिया गया है।
अवधारणा
- एक औपचारिक ई-मेल में विषय (Subject line), उचित संबोधन (महोदय/महोदया), स्पष्ट व संक्षिप्त विषय-वस्तु, तथा अंत में सधन्यवाद व प्रेषक का नाम-पद अनिवार्य होता है
आवश्यक तत्व
- पुस्तकालय अध्यक्षा तनुजा की ओर से पुस्तक विक्रेता को पुस्तकें मँगवाने संबंधी ई-मेल में आवश्यक पुस्तकों की सूची, प्रतियों की संख्या, भुगतान की विधि तथा डिलीवरी की समय-सीमा जैसे व्यावहारिक विवरण स्पष्ट रूप से देने चाहिए
परीक्षा में सावधानी
- विद्यार्थी प्रायः ई-मेल को पत्र की भाँति लिखते समय 'सेवा में/पते' जैसे अनावश्यक तत्व जोड़ देते हैं, जबकि ई-मेल में 'प्रति' व 'विषय' पंक्ति देना पर्याप्त है
- लगभग 80 शब्दों की शब्द-सीमा का पालन करना भी आवश्यक है
वास्तविक जीवन में
- विद्यालय, कार्यालय व व्यावसायिक संस्थान आज ई-मेल के माध्यम से ही अधिकांश औपचारिक पत्राचार करते हैं, इसलिए यह कौशल परीक्षा से आगे बढ़कर व्यावहारिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी है
Interesting facts
CBSE ने हाल के वर्षों में डिजिटल संप्रेषण कौशल को बढ़ावा देने हेतु पाठ्यक्रम में औपचारिक ई-मेल लेखन को शामिल किया है, जो पहले केवल पत्र-लेखन तक सीमित था।
विश्व स्तर पर प्रतिदिन लगभग 350 अरब से अधिक ई-मेल भेजे जाते हैं, जिनमें व्यावसायिक व औपचारिक ई-मेल का बड़ा हिस्सा शामिल है।
औपचारिक ई-मेल में स्पष्ट 'विषय पंक्ति' (Subject line) होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि इससे प्राप्तकर्ता को ई-मेल की प्राथमिकता तुरंत समझ आती है।
Question details
Q66 of 66 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course B
- Year
- 2026
- Section
- Section घ
- Marks
- 5
- Type
- Long Answer
- Chapter
- लेखन कौशल – सूचना लेखन (CBSE हिंदी 'ब' रचनात्मक लेखन खंड)
- Topic
- ई-मेल लेखन – पुस्तकालय हेतु पुस्तकें मँगवाना
- Bloom's level
- create
- Syllabus topic
- रचनात्मक लेखन: औपचारिक ई-मेल लेखन (Formal Email Writing) – व्यावसायिक पत्राचार
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
औपचारिक ई-मेल और औपचारिक पत्र में क्या मुख्य अंतर है?
ई-मेल में 'प्रति' व 'विषय' पंक्ति पर्याप्त होती है और यह डिजिटल माध्यम से भेजी जाती है, जबकि पत्र में 'सेवा में/पता' व दिनांक जैसी अतिरिक्त औपचारिकताएँ होती हैं।
ई-मेल में 'विषय पंक्ति' (Subject line) क्यों महत्वपूर्ण है?
विषय पंक्ति प्राप्तकर्ता को ई-मेल के उद्देश्य की तुरंत जानकारी देती है, जिससे ई-मेल का उत्तर शीघ्र व सही प्रकार से मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या ई-मेल में पुस्तकों की सूची क्रमांकित करना आवश्यक है?
अनिवार्य नहीं, परंतु क्रमांकित सूची देने से ई-मेल अधिक स्पष्ट, सुव्यवस्थित व पढ़ने में सुविधाजनक बनती है, जिससे बेहतर अंक मिलने की संभावना रहती है।