पत्थर, छेनी और मूर्ति का उदाहरण यहाँ किस उद्देश्य से दिया गया है ?
पत्थर, छेनी और मूर्ति का उदाहरण यहाँ किस उद्देश्य से दिया गया है ?
Options
सही विकल्प (ख): 'जीवन निखारने के लिए कष्टों का महत्त्व समझाने हेतु' — जैसे छेनी की चोट पत्थर को मूर्ति बनाती है, वैसे ही कष्ट जीवन को निखारते हैं।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (ख) चुनने पर पूर्ण अंक।
Hint
यह उदाहरण तकनीकी प्रक्रिया के लिए नहीं, बल्कि 'कष्ट सहकर निखार आना' इस जीवन-सिद्धांत को स्थापित करने के लिए दिया गया है।
Quick Oral Answer
यह उदाहरण यह समझाने के लिए दिया गया है कि जैसे मूर्ति बनाने के लिए पत्थर को छेनी की चोट सहनी पड़ती है, वैसे ही जीवन को निखारने के लिए कष्ट सहना आवश्यक है।
Analysis & Explanation
पत्थर, छेनी और मूर्ति का उदाहरण मूर्तिकला की तकनीकी प्रक्रिया बताने के लिए नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन समझाने के लिए दिया गया है।
मूल आशय
- जैसे पत्थर बिना छेनी की चोट सहे मूर्ति नहीं बनता, वैसे ही जीवन भी बिना कष्ट स्वीकारे नहीं निखरता
- अतः सही उद्देश्य: जीवन निखारने में कष्टों का महत्त्व स्थापित करना — विकल्प (ख)
अन्य विकल्प गलत क्यों
- विकल्प (क): गद्यांश मूर्तिकला की तकनीक सिखाने के लिए नहीं लिखा गया
- विकल्प (ग): आंशिक सत्य पर अधूरा — केवल 'अनगढ़ता' परिचय उद्देश्य नहीं, निखार की प्रक्रिया (कष्ट सहना) मुख्य बिंदु है
- विकल्प (घ): 'अन्योन्याश्रयिता' गद्यांश के अन्य भाग से मेल खाता प्रतीत हो सकता है, पर इस विशिष्ट उदाहरण का केंद्रीय उद्देश्य कष्ट सहकर निखरना ही है
परीक्षा में सावधानी
- निकटतम प्रतीत होने वाले विकल्पों में से गद्यांश के सबसे प्रत्यक्ष व केंद्रीय भाव वाला विकल्प चुनें।
Common Mistakes
- 1विकल्प (क) को चुनना, यह सोचकर कि प्रश्न मूर्तिकला की प्रक्रिया के बारे में है, जबकि यह एक रूपक है।
- 2विकल्प (ग) या (घ) को चुनना, आंशिक सत्य से भ्रमित होकर, बिना गद्यांश के केंद्रीय संदेश को समझे।
Interesting Facts
'कष्ट सहकर निखार आना' का यह भाव संस्कृत सुभाषितों में भी मिलता है, जैसे 'तपसा किम् न साध्यते' — तप से क्या असाध्य है।
CBSE अपठित गद्यांश MCQ में प्रायः एक विकल्प आंशिक रूप से सही किंतु अधूरा रखा जाता है ताकि गहन समझ की जाँच हो सके।
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Frequently Asked Questions
क्या यह उदाहरण मूर्तिकला सिखाने के लिए है?
नहीं, यह एक रूपक है जिसका उद्देश्य जीवन में कष्टों के महत्त्व को समझाना है, न कि मूर्ति बनाने की तकनीक सिखाना।