Q27
1 markVery Short AnswerSection खंड ख

हे भगवान ! यह कैसी खबर आई?

(रेखांकित पद 'हे भगवान' का पद-परिचय लिखिए)

अपठित बोध (काव्यांश)
पद-परिचय — विस्मयादिबोधक अव्यय
Official Answer

'हे भगवान' — विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्य/खेद का भाव प्रकट करने हेतु प्रयुक्त, अविकारी शब्द; वाक्य से स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त।

विस्मयादिबोधक अव्ययअव्ययअविकारी शब्दआश्चर्यसूचकखेद

Marking Scheme

  • 11 अंक: विस्मयादिबोधक अव्यय तथा आश्चर्य/खेद का भाव प्रकट करने का उल्लेख होने पर पूर्ण अंक; केवल 'अव्यय' लिखने पर आंशिक अंक।

Hint

जो शब्द आश्चर्य, हर्ष, शोक आदि भाव प्रकट करे और विस्मयादिबोधक चिह्न (!) के साथ आए, वह विस्मयादिबोधक अव्यय होता है।

Quick Oral Answer

'हे भगवान' एक विस्मयादिबोधक अव्यय है, जो वक्ता के आश्चर्य या खेद के भाव को प्रकट करता है और यह अविकारी शब्द है।

Analysis & Explanation

'हे भगवान' का पद-परिचय अव्यय (अविकारी शब्द) के भेदों की पहचान जाँचता है।


अवधारणा

  • यह शब्द-समूह वाक्य-संरचना से स्वतंत्र होकर वक्ता के आकस्मिक भाव (आश्चर्य/खेद) को प्रकट करता है — अतः विस्मयादिबोधक अव्यय।

मुख्य बिंदु

  • अव्यय अविकारी होता है, अर्थात् इसमें लिंग, वचन, कारक के अनुसार कोई रूप-परिवर्तन नहीं होता।
  • यह मुख्य वाक्य के कर्ता-क्रिया संबंध से स्वतंत्र, भाव-सूचक अंश है।

परीक्षा में सावधानी

  • 'हे भगवान' को संबोधन कारक की संज्ञा समझने की भूल न करें; यह पूर्णतः विस्मयादिबोधक अव्यय है।

वास्तविक जीवन

  • बोलचाल और साहित्यिक लेखन दोनों में भाव-प्रकटीकरण हेतु ऐसे अव्ययों का प्रयोग होता है।

Common Mistakes

  1. 1'हे भगवान' को संज्ञा या संबोधन कारक बता देना, जबकि यह विस्मयादिबोधक अव्यय है।
  2. 2अव्यय के अविकारी स्वरूप का उल्लेख न करना।
  3. 3किस भाव (आश्चर्य/खेद) को व्यक्त कर रहा है, यह न बताना।

Interesting Facts

अव्यय के चार प्रमुख भेद होते हैं — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक अव्यय।

विस्मयादिबोधक अव्यय के साथ सदैव विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है।

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Frequently Asked Questions

विस्मयादिबोधक अव्यय क्या है?

वे अविकारी शब्द जो हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा आदि भाव प्रकट करते हैं और विस्मयादिबोधक चिह्न (!) के साथ प्रयुक्त होते हैं, विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं।

अव्यय शब्द अविकारी क्यों कहलाते हैं?

क्योंकि इनका रूप लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार परिवर्तित नहीं होता।