सोशल मीडिया के युग में अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना क्यों है?
सोशल मीडिया के युग में अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना क्यों है?
Options
ग — सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमकाकर दिखाता है, जिससे स्वयं में स्थिर रहना एक कठिन साधना बन जाता है।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प 'ग' चुनने पर पूरा अंक।
Hint
गद्यांश की उस पंक्ति को खोजें जिसमें 'सोशल मीडिया' और 'साधना' शब्द एक साथ आए हैं।
Quick Oral Answer
सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियाँ चमकाकर दिखाता है, जिससे व्यक्ति ललचाता है; इसलिए स्वयं में स्थिर रहना एक साधना है।
Analysis & Explanation
सोशल मीडिया निरंतर दूसरों की सफलता को आकर्षक रूप में दिखाकर व्यक्ति को असंतुष्ट करता है, इसलिए आत्म-स्थिरता एक साधना है।
कारण/तर्क
- गद्यांश की पंक्ति — 'जहाँ सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमका कर पेश करता है, वहाँ अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना है।'
- विकल्प 'क', 'ख', 'घ' गद्यांश के मूल भाव से मेल नहीं खाते।
परीक्षा में सावधानी
- विकल्प चुनते समय गद्यांश की मूल पंक्ति से सीधा मिलान करें, अनुमान न लगाएँ।
Common Mistakes
- 1गद्यांश की मूल पंक्ति को न पढ़कर सामान्य अनुमान से उत्तर देना।
- 2विकल्प 'ख' को चुनना जो गद्यांश के मूल भाव के विपरीत है।
Interesting Facts
आधुनिक मनोविज्ञान में 'सोशल कम्पेरिजन थ्योरी' (Social Comparison Theory) बताती है कि सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियाँ देखकर मनुष्य में असंतोष बढ़ता है, जो इस गद्यांश के भाव से मेल खाता है।
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Frequently Asked Questions
गद्यांश में आत्म-स्थिरता को साधना क्यों कहा गया है?
क्योंकि सोशल मीडिया निरंतर दूसरों की उपलब्धियाँ दिखाकर व्यक्ति को ललचाता है, ऐसे में स्थिर रहना कठिन साधना जैसा है।