Question 321 markVery Short AnswerSection खंड ख

'उत्प्रेक्षा अलंकार' का एक उपयुक्त उदाहरण काव्य-पंक्ति द्वारा लिखिए।

अपठित बोध (काव्यांश)
उत्प्रेक्षा अलंकार

Official answer

काव्य-पंक्ति: 'सोहत ओढ़े पीतु पट स्याम सलोने गात। मनु नीलमनि सैल पर आतपु परयो प्रभात।' (बिहारी सतसई)

स्पष्टीकरण: श्याम देह पर पीले वस्त्र की शोभा को नीलमणि पर्वत पर प्रातःकालीन धूप पड़ने की संभावना 'मनु' (मानो) शब्द द्वारा व्यक्त किया गया है, अतः यह उत्प्रेक्षा अलंकार है।

Answer keywords:उत्प्रेक्षा अलंकारमनोजनुमानोसंभावनाउपमेय में उपमान की कल्पनाबिहारी सतसई

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: सही एवं स्पष्ट उत्प्रेक्षा अलंकार वाली काव्य-पंक्ति (मनो/जनु/मानो शब्द सहित) लिखने पर।
  2. 2.यदि विद्यार्थी स्वरचित सही उदाहरण दे जिसमें संभावना-वाचक शब्द स्पष्ट प्रयुक्त हो, तो पूर्ण अंक दिए जाएँ।

Hint

'मनो', 'जनु', 'मानो' जैसे संभावना-सूचक वाचक शब्द वाली पंक्ति खोजें।

Quick oral answer

उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय में उपमान होने की संभावना 'मनो', 'जनु', 'मानो' जैसे शब्दों से व्यक्त की जाती है, जैसे 'सोहत ओढ़े पीतु पट...मनु नीलमनि सैल पर आतपु परयो प्रभात।'

Common mistakes

  1. 1.उपमा और उत्प्रेक्षा के वाचक शब्दों में अंतर न करना।
  2. 2.पंक्ति में संभावना-सूचक शब्द ('मानो' आदि) का प्रयोग न होने पर भी उसे उत्प्रेक्षा बताना।
  3. 3.अलंकार का नाम सही लेकिन पंक्ति गलत/असंगत उदाहरण देना।

Analysis and explanation

उत्प्रेक्षा अलंकार में कवि उपमेय में उपमान की पूर्ण संभावना या कल्पना करता है, जिसे 'मनो/जनु/मानो/मानहुं' जैसे वाचक शब्द व्यक्त करते हैं।


संकल्पना

  • उपमा में केवल तुलना (सम/सा/सरिस) होती है, जबकि उत्प्रेक्षा में संभावना/कल्पना (मनो/जनु/मानो) व्यक्त होती है — यही मूल अंतर है।
  • यह अलंकार कवि की कल्पनाशीलता और चमत्कारपूर्ण वर्णन-शैली का प्रमाण है।

परीक्षा में सावधानी

  • विद्यार्थी प्रायः उपमा और उत्प्रेक्षा को एक समझ बैठते हैं; पहचान का एकमात्र निश्चित आधार वाचक शब्द है — 'सम/सा' उपमा के, 'मनो/जनु/मानो' उत्प्रेक्षा के।

वास्तविक जीवन

  • रोज़मर्रा की भाषा में 'मानो वह परी ही हो' कहना भी उत्प्रेक्षा अलंकार का ही उदाहरण है।

Interesting facts

उत्प्रेक्षा अलंकार को अलंकार-शास्त्र में 'सर्वाधिक प्रयुक्त' अलंकार माना गया है क्योंकि यह सामान्य बोलचाल में भी स्वाभाविक रूप से आता है।

आचार्य दंडी ने उपमा को 'अलंकारों का मूल' कहा है, क्योंकि अधिकांश अन्य अलंकार (रूपक, उत्प्रेक्षा आदि) उपमा से ही विकसित माने जाते हैं।

Question details

Q32 of 64 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course A
Year
2026
Section
Section खंड ख
Marks
1
Type
Very Short Answer
Chapter
अपठित बोध (काव्यांश)
Topic
उत्प्रेक्षा अलंकार
Bloom's level
apply
Syllabus topic
व्याकरण: अलंकार — उत्प्रेक्षा अलंकार (मनो/जनु/मानो वाचक शब्द)
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

उपमा और उत्प्रेक्षा में मुख्य अंतर क्या है?

उपमा में सीधी तुलना (सम/सा) होती है, जबकि उत्प्रेक्षा में उपमेय में उपमान होने की कल्पना/संभावना (मनो/जनु/मानो) व्यक्त की जाती है।

उत्प्रेक्षा अलंकार के वाचक शब्द कौन-से हैं?

मनो, जनु, मानो, मानहुं, जानो आदि उत्प्रेक्षा अलंकार के वाचक/संभावना-सूचक शब्द हैं।