'प्रयास करने पर पुरुष भी बच्चों का पालन-पोषण भली-भाँति कर सकते हैं।' 'माता का अँचल' पाठ में वर्णित भोलानाथ और उसके पिता के जीवन-प्रसंगों से दो उदाहरण लेते हुए इस कथन के पक्ष में उचित तर्क प्रस्तुत कीजिए।
'प्रयास करने पर पुरुष भी बच्चों का पालन-पोषण भली-भाँति कर सकते हैं।' 'माता का अँचल' पाठ में वर्णित भोलानाथ और उसके पिता के जीवन-प्रसंगों से दो उदाहरण लेते हुए इस कथन के पक्ष में उचित तर्क प्रस्तुत कीजिए।
Official answer
'माता का अँचल' पाठ में भोलानाथ के पिता (पाठ में केवल 'पिताजी' कहा गया है, कोई व्यक्तिगत नाम नहीं) अपने पुत्र से अत्यंत घनिष्ठ व स्नेहपूर्ण संबंध रखते हैं, जो सिद्ध करता है कि पुरुष भी प्रयासपूर्वक बच्चों का उचित पालन-पोषण कर सकते हैं।
पहला उदाहरण — पिता तड़के स्नान कर पूजा-पाठ में बैठते समय भोलानाथ को भी साथ बिठाते हैं, उसे भभूत का तिलक लगाते हैं, कंधे पर घुमाते हैं तथा खेल-खेल में उसके साथ कुश्ती लड़ते, झुलाते और दुलारते हैं — इस तरह प्रतिदिन नियमित स्नेह व देखभाल में स्वयं को सम्मिलित रखते हैं।
दूसरा उदाहरण — बच्चों के घरौंदा, बरात व खेती जैसे खेलों में पिता कभी-कभी स्वयं सम्मिलित हो जाते हैं और भोलानाथ के साथ आनंदपूर्वक समय बिताते हैं।
इन दोनों प्रसंगों से स्पष्ट होता है कि नियमित स्नेह, समय व सहभागिता देकर पिता ने पालन-पोषण में सक्रिय भूमिका निभाई — जो सिद्ध करता है कि उचित प्रयास से पुरुष भी बच्चों का सफल पालन-पोषण कर सकते हैं।
Marking scheme
- 1.1 अंक: कथन के पक्ष में स्पष्ट भूमिका/मत प्रस्तुत करना कि पुरुष भी उचित प्रयास से पालन-पोषण कर सकते हैं।
- 2.1.5 अंक: पहला उदाहरण — पिता का भोलानाथ के साथ प्रतिदिन पूजा-पाठ, कंधे पर घुमाना व खेल-खेल में कुश्ती/दुलार — सही ढंग से वर्णित।
- 3.1.5 अंक: दूसरा उदाहरण — बच्चों के खेलों (घरौंदा/बरात) में पिता का सम्मिलित होना — सही ढंग से वर्णित एवं कथन से जोड़ना।
Hint
दो ठोस पाठ-आधारित उदाहरण दें — (1) पिता का प्रतिदिन पूजा व खेल में साथ देना व कंधे पर घुमाना, (2) बच्चों के खेलों (घरौंदा, बरात) में पिता का सम्मिलित होना — सर्प के डर वाले प्रसंग का प्रयोग न करें, वह माँ से संबंधित है।
Quick oral answer
भोलानाथ के पिता उसे प्रतिदिन पूजा-पाठ में साथ बिठाते, कंधे पर घुमाते और खेलों में शामिल होते हैं — यह दिखाता है कि प्रयास करने पर पुरुष भी बच्चों का उचित पालन-पोषण कर सकते हैं।
Common mistakes
- 1.पिता को 'तेवारी जी' या कोई अन्य काल्पनिक नाम दे देना, जबकि पाठ में उनका कोई व्यक्तिगत नाम नहीं दिया गया है।
- 2.सर्प के डर पर सांत्वना देने वाले प्रसंग को पिता से जोड़ देना, जबकि पाठ में यह भूमिका माँ की दिखाई गई है।
Analysis and explanation
यह प्रश्न शिवपूजन सहाय रचित संस्मरणात्मक निबंध 'माता का अँचल' (कृतिका भाग 2) पर आधारित है, जिसमें भोलानाथ (लेखक का बचपन का नाम) और उसके पिता के घनिष्ठ संबंधों का चित्रण है।
परीक्षा में सावधानी
- पाठ में पिता को कोई व्यक्तिगत नाम नहीं दिया गया — उन्हें केवल 'पिताजी' कहा गया है; यह एक सामान्य त्रुटि है जिससे बचना चाहिए।
- संकट/भय के क्षण (जैसे सर्प दिखने पर बच्चों का भागकर माँ की गोद में सांत्वना पाना) माँ से जुड़ा प्रसंग है, इसे पिता के उदाहरण के रूप में प्रयोग न करें।
उत्तर की कुंजी
- पिता की भूमिका दैनिक स्नेह, पूजा-पाठ में साथ बिठाना, कंधे पर घुमाना तथा बच्चों के खेलों में सम्मिलित होना जैसे प्रसंगों से सिद्ध करें।
वास्तविक जीवन
- यह पाठ सिखाता है कि पालन-पोषण में पिता व माता दोनों की भूमिकाएँ अलग-अलग रूपों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं, और आज भी पिता बच्चों की परवरिश में समान भागीदार बन सकते हैं।
Interesting facts
शिवपूजन सहाय हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार व संपादक थे; उनका बचपन का नाम भोलानाथ (वास्तविक नाम तारकेश्वरनाथ) था और यह पाठ उनके आत्मकथात्मक वृत्तांत पर आधारित है।
'माता का अँचल' कक्षा 10 की कृतिका भाग-2 (पूरक पाठ्यपुस्तक) का पहला पाठ है, जो ग्रामीण बालपन और माता-पिता के स्नेह का सजीव चित्रण करता है।
Question details
Q53 of 64 questions
- Board
- CBSE
- Class
- Class 10
- Subject
- Hindi Course A
- Year
- 2026
- Section
- Section खंड ग
- Marks
- 4
- Type
- Short Answer
- Chapter
- यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
- Topic
- माता का अँचल — भोलानाथ और पिता का जीवन-प्रसंग
- Bloom's level
- analyze
- Syllabus topic
- कृतिका भाग 2 (पूरक पाठ्यपुस्तक): 'माता का अँचल' (शिवपूजन सहाय)
- Author
- CBSE
- Reviewed by
- Padhantu Academic Team
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Frequently asked questions
भोलानाथ के पिता का क्या नाम था?
पाठ में पिता का कोई व्यक्तिगत नाम नहीं दिया गया है — उन्हें केवल 'पिताजी' कहकर संबोधित किया गया है। (भोलानाथ स्वयं लेखक शिवपूजन सहाय का बचपन का नाम है, वास्तविक नाम तारकेश्वरनाथ था।)
'माता का अँचल' पाठ किस पुस्तक और विधा का है?
यह शिवपूजन सहाय का एक आत्मकथात्मक संस्मरण है, जो कक्षा 10 की कृतिका भाग-2 (पूरक पाठ्यपुस्तक) में सम्मिलित है, क्षितिज में नहीं।