आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए – पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए – पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
मानवीकरण अलंकार — यहाँ निर्जीव 'धूल' को स्त्री की भाँति घाघरा उठाकर भागने की मानवीय क्रिया करते दिखाया गया है, अर्थात् जड़ वस्तु में मानवीय चेष्टा का आरोपण हुआ है।
Marking Scheme
- 11 अंक: 'मानवीकरण अलंकार' सही नाम लिखने पर पूर्ण अंक।
Hint
जहाँ निर्जीव वस्तु मनुष्य के समान क्रिया करती दिखाई जाए (जैसे धूल का घाघरा उठाकर भागना), वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
Quick Oral Answer
यहाँ मानवीकरण अलंकार है क्योंकि निर्जीव धूल को स्त्री की तरह घाघरा उठाकर भागने की मानवीय क्रिया करते दिखाया गया है।
Analysis & Explanation
यह प्रश्न मानवीकरण अलंकार की पहचान जाँचता है, जहाँ निर्जीव वस्तु में मानवीय चेष्टा का आरोपण होता है।
अवधारणा
- 'धूल' निर्जीव है, परंतु उसे स्त्री की भाँति 'घाघरा उठाए भागती' हुई दिखाया गया है — यह मानवीय क्रिया है।
मुख्य बिंदु
- कोई वाचक शब्द ('मानो', 'जनु') नहीं है; निर्जीव वस्तु सीधे मनुष्य-सी क्रिया करती दिखाई गई है।
परीक्षा में सावधानी
- मानवीकरण को उपमा/रूपक से न मिलाएँ — यहाँ स्पष्ट उपमेय-उपमान संबंध नहीं, बल्कि सीधा चेतनारोपण है।
वास्तविक जीवन
- छायावादी काव्य (पंत, निराला) में प्रकृति-चित्रण हेतु मानवीकरण अलंकार का प्रचुर प्रयोग मिलता है।
Common Mistakes
- 1मानवीकरण को उत्प्रेक्षा अलंकार समझ लेना, जबकि उत्प्रेक्षा में संभावना/कल्पना ('मानो', 'जनु') सूचक शब्द आते हैं जो यहाँ अनुपस्थित हैं।
- 2'घाघरा उठाए भागना' मानवीय क्रिया है, यह न पहचान पाना।
Interesting Facts
मानवीकरण अलंकार का सर्वाधिक प्रयोग छायावादी कवियों — जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' — की प्रकृति-चित्रण कविताओं में मिलता है।
मानवीकरण अलंकार में प्रकृति के तत्व (नदी, बादल, हवा, धूल) मनुष्य की भाँति हँसते, रोते, नाचते या भागते दिखाए जाते हैं।
Spotted a mistake or something unclear?
Tell us — we fix reported answers fast.
Frequently Asked Questions
मानवीकरण अलंकार किसे कहते हैं?
जब निर्जीव या प्रकृति-संबंधी वस्तु में मानवीय भाव व क्रिया का आरोपण किया जाए, तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
मानवीकरण और उत्प्रेक्षा अलंकार में अंतर क्या है?
उत्प्रेक्षा में 'मानो', 'जनु' जैसे कल्पना-सूचक शब्द आते हैं, जबकि मानवीकरण में निर्जीव वस्तु को सीधे मनुष्य के समान क्रियाशील दिखाया जाता है, बिना किसी सूचक शब्द के।