इस काव्यांश में कवि ने उषा का कौन-सा चित्र प्रस्तुत किया है ?
इस काव्यांश में कवि ने उषा का कौन-सा चित्र प्रस्तुत किया है ?
Options
सही विकल्प — (C) शब्दचित्र। कवि ने शब्दों के माध्यम से भोर के दृश्य का इतना जीवंत व चित्रात्मक वर्णन किया है कि पाठक की आँखों के सामने मानो चित्र साकार हो उठता है — इसे ही 'शब्दचित्र' कहा जाता है।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (C) चुनने पर पूर्ण अंक; आंशिक अंक नहीं दिए जाते।
Hint
सोचें कि कविता किस माध्यम — शब्द, रंग, रेखा या दीवार — से चित्र बनाती है।
Quick Oral Answer
कवि ने शब्दों के माध्यम से भोर का इतना जीवंत चित्र खींचा है कि पाठक की कल्पना में दृश्य साकार हो उठता है — इसे 'शब्दचित्र' कहते हैं।
Analysis & Explanation
संदर्भ: 'उषा' कविता अपनी सघन बिंब-योजना और चित्रात्मक भाषा के लिए जानी जाती है, जिसमें कवि रंगों व उपमाओं से भोर का दृश्य रचते हैं।
सही विकल्प क्यों: कविता में प्रयुक्त उपमाएँ (राख से लीपा चौका, काली सिल, लाल केसर) सभी भाषा/शब्दों के माध्यम से बनाए गए हैं, भौतिक रंग या रेखा के माध्यम से नहीं — यही 'शब्दचित्र' की पहचान है।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
- (A) 'छायाचित्र' यंत्र (कैमरा) से लिया गया वास्तविक चित्र होता है, जबकि यहाँ कल्पना व भाषा से चित्र रचा गया है।
- (B) 'रेखाचित्र' रेखाओं द्वारा बनाया गया चित्र होता है — कविता में कोई रेखांकन नहीं है।
- (D) 'भित्तिचित्र' दीवार पर बनाई गई चित्रकारी को कहते हैं, जिसका इस काव्यांश से कोई संबंध नहीं है।
Common Mistakes
- 1'चित्र' शब्द देखकर सीधे 'छायाचित्र' या 'भित्तिचित्र' जैसे भौतिक चित्रों से जोड़ देना, जबकि यहाँ काव्य-भाषा से रचित चित्र (शब्दचित्र) की बात हो रही है।
- 2'रेखाचित्र' और 'शब्दचित्र' में अंतर न समझ पाना — रेखाचित्र रेखाओं से बनता है जबकि शब्दचित्र भाषा से।
Interesting Facts
'उषा' कविता को आलोचकों ने हिंदी काव्य में शब्दचित्रण की सर्वश्रेष्ठ मिसालों में से एक माना है।
शमशेर बहादुर सिंह ने प्रारंभ में चित्रकला की विधिवत शिक्षा ली थी, जिसके प्रभाव से उनकी कविताओं में यह चित्रात्मक शैली विकसित हुई।
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Frequently Asked Questions
'शब्दचित्र' का क्या अर्थ है ?
'शब्दचित्र' का अर्थ है — शब्दों/भाषा के माध्यम से किसी दृश्य या वस्तु का इतना जीवंत वर्णन करना कि वह पाठक की कल्पना में चित्र की भाँति साकार हो उठे।
'उषा' कविता को शब्दचित्र क्यों कहा जाता है ?
क्योंकि कवि ने बिना किसी वास्तविक चित्रकारी के, केवल उपमाओं और बिंबों के माध्यम से भोर के दृश्य को इतना सजीव बना दिया है कि वह मन में चित्र की तरह उभरता है।