निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए : (2 × 3 = 6)
(i) "सब घर एक कर देना" – पंक्ति का बच्चों और कविता के संदर्भ में क्या औचित्य है ? 'कविता के बहाने' कविता के आधार पर लिखिए ।
(ii) 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता को आप करुणा की कविता मानते हैं या क्रूरता की ? तर्क सहित उत्तर लिखिए ।
(iii) 'तुलसीदास का युग बेरोज़गारी से त्रस्त था' – 'कवितावली' के संदर्भ में इस कथन को सिद्ध कीजिए ।
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए : (2 × 3 = 6)
(i) "सब घर एक कर देना" – पंक्ति का बच्चों और कविता के संदर्भ में क्या औचित्य है ? 'कविता के बहाने' कविता के आधार पर लिखिए ।
(ii) 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता को आप करुणा की कविता मानते हैं या क्रूरता की ? तर्क सहित उत्तर लिखिए ।
(iii) 'तुलसीदास का युग बेरोज़गारी से त्रस्त था' – 'कवितावली' के संदर्भ में इस कथन को सिद्ध कीजिए ।
नोट: दिए गए तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 60-60 शब्दों में अपेक्षित हैं।
(i) 'सब घर एक कर देना' का औचित्य:
यह पंक्ति 'कविता के बहाने' में बच्चे के निश्च्छल, सीमाहीन खेल-भाव को दर्शाती है। खेल के बहाने बच्चा अपने-पराए का भेद मिटाकर सभी घरों/वस्तुओं को एक कर देता है। यही कविता का भी औचित्य है — कवि भी बहाने (बिंब-उपमा) के सहारे भिन्न दिखने वाली वस्तुओं को जोड़कर उनकी मूल एकता और सार्वभौमिकता उद्घाटित करता है, ठीक वैसे ही जैसे बचपन का खेल हर भेद को मिटा देता है।
(ii) 'कैमरे में बंद अपाहिज' — करुणा या क्रूरता ?
यह कविता वस्तुतः क्रूरता की कविता है, करुणा की नहीं। टी.वी. कैमरा टीम अपाहिज व्यक्ति की सच्ची पीड़ा को संवेदनशीलता से नहीं, तमाशे के रूप में प्रस्तुत करती है — उसे बार-बार 'थोड़ा मुस्कराने' और 'थोड़ा रोने' का निर्देश देकर उसकी असहायता का अभिनय करवाया जाता है। दर्शकों की सहानुभूति बटोरने हेतु वास्तविक पीड़ा को व्यावसायिक तमाशा बना देना मीडिया की गहरी संवेदनहीनता और क्रूरता को उजागर करता है।
(iii) तुलसीदास का युग बेरोज़गारी से त्रस्त:
'कवितावली' में तुलसीदास ने किसान, व्यापारी, भिखारी, कायस्थ, ब्राह्मण — हर वर्ग को जीविका के अभाव में त्रस्त दिखाया है। 'किसबी, किसान कुल बनिक भिखारी' जैसी पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि कोई खेती, व्यापार, भीख या नौकरी से भी पेट नहीं भर पा रहा था। यह चित्रण तत्कालीन युग की गहरी बेरोज़गारी और आर्थिक विपन्नता को प्रमाणित करता है।
Marking Scheme
- 1किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर अपेक्षित; प्रत्येक उत्तर 3 अंकों का ।
- 21 अंक: संदर्भ/प्रसंग एवं कविता की पहचान सही होना ।
- 31 अंक: प्रश्न के अनुसार सटीक एवं तर्कसंगत विवेचन ।
- 41 अंक: भाषा की स्पष्टता एवं उदाहरण/पंक्ति के उद्धरण सहित निष्कर्ष ।
Hint
प्रत्येक उत्तर में कविता/कवि का नाम, मूल भाव और एक उद्धरण अवश्य शामिल करें।
Quick Oral Answer
'कविता के बहाने' बचपन की निश्च्छलता, 'कैमरे में बंद अपाहिज' मीडिया की संवेदनहीनता, और 'कवितावली' मध्यकालीन बेरोज़गारी को दर्शाती है।
Analysis & Explanation
अवधारणा: यह प्रश्न-सेट तीन भिन्न कविताओं — 'कविता के बहाने' (बालपन का निश्च्छल खेल), 'कैमरे में बंद अपाहिज' (मीडिया की संवेदनहीनता) और 'कवितावली' (मध्यकालीन बेरोज़गारी) — पर आधारित है, जिनमें से परीक्षार्थी को किन्हीं दो का चयन करना है।
परीक्षा में सावधानी: उत्तर लिखते समय कविता के शीर्षक व कवि का नाम अवश्य लिखें और मूल पंक्ति/भाव को उद्धृत करें; बिना उदाहरण के सामान्यीकृत उत्तर अंक नहीं दिलाता।
वास्तविक जीवन में: 'कैमरे में बंद अपाहिज' आज के TRP-केंद्रित मीडिया की सच्चाई को उजागर करती है, जबकि 'कवितावली' की बेरोज़गारी आज भी प्रासंगिक सामाजिक-आर्थिक समस्या है।
Common Mistakes
- 1तीनों प्रश्नों के उत्तर लिखने का प्रयास करना जबकि केवल दो अपेक्षित हैं, जिससे समय बर्बाद होता है।
- 2'कैमरे में बंद अपाहिज' को केवल करुणा की कविता मानकर मीडिया की क्रूरता के पहलू को नज़रअंदाज़ करना।
- 3'कवितावली' के उत्तर में मूल पंक्ति (जैसे 'किसबी किसान कुल बनिक भिखारी') उद्धृत न करना।
Interesting Facts
कुँवर नारायण को 2005 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवियों में गिने जाते हैं।
रघुवीर सहाय पत्रकार भी थे और उनकी कविताएँ प्रायः रोज़मर्रा की सामाजिक विडंबनाओं पर तीखा व्यंग्य करती हैं।
'कवितावली' तुलसीदास की रचना है जो ब्रजभाषा में सवैया-छंद में लिखी गई है, जबकि 'रामचरितमानस' अवधी में चौपाई-दोहा छंद में रचित है।
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Frequently Asked Questions
'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता किसकी है ?
यह कविता रघुवीर सहाय की है, जो मीडिया द्वारा मानवीय पीड़ा के व्यावसायीकरण पर व्यंग्य करती है।
'कवितावली' किस छंद में रचित है ?
'कवितावली' ब्रजभाषा में सवैया और कवित्त छंदों में तुलसीदास द्वारा रचित है।