गद्यांश के अनुसार 'सभ्यता' का अभिप्राय क्या है ?
गद्यांश के अनुसार 'सभ्यता' का अभिप्राय क्या है ?
Options
सही विकल्प (D): मनुष्य के भौतिक विकास का क्रम।
गद्यांश सभ्यता को मनुष्य की बाहरी/भौतिक उन्नति बताता है — घर बनाना, खेती करना, कपड़ा बुनना, और आगे रेलगाड़ी, मोटर, हवाई जहाज तक पहुँचने का क्रमिक भौतिक विकास ही सभ्यता है।
Marking Scheme
- 11 अंक: सही विकल्प (D) चुनने पर पूर्ण अंक।
- 2आंशिक अंक नहीं — यह वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न है।
Hint
गद्यांश में सभ्यता के दिए गए उदाहरण देखें — घर, खेती, कपड़ा, मोटर — सभी भौतिक हैं।
Quick Oral Answer
सभ्यता का अभिप्राय है मनुष्य के भौतिक/बाहरी विकास का क्रम — घर, खेती, वस्त्र से लेकर आधुनिक यातायात-साधनों तक।
Analysis & Explanation
सही उत्तर (D) क्यों:
गद्यांश असभ्यता से सभ्यता तक की यात्रा को क्रमवार भौतिक उपलब्धियों (कृषि, आवास, वस्त्र-निर्माण, फिर रेलगाड़ी-मोटर-हवाई जहाज) के रूप में वर्णित करता है — यही 'भौतिक विकास का क्रम' है।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
- (A) 'कलाकार बनाना' संस्कृति की विशेषता है, सभ्यता की नहीं।
- (B) 'स्वाधीन चिंतन' गद्यांश में उल्लेखित ही नहीं है।
- (C) 'ऐश्वर्यपूर्ण कहानी' अतिशयोक्तिपूर्ण शब्द है और गद्यांश से असंबद्ध है।
सावधानी: सभ्यता=बाहरी/भौतिक और संस्कृति=भीतरी/सूक्ष्म — इस मूल भेद को सदैव याद रखें ताकि दोनों की परिभाषाएँ आपस में न उलझें।
Common Mistakes
- 1सभ्यता को भी संस्कृति की तरह भावनात्मक/आंतरिक गुण मान लेना।
- 2'ऐश्वर्य' जैसे आकर्षक किंतु असंबद्ध शब्द वाले विकल्प के भ्रम में पड़ना।
Interesting Facts
गद्यांश में सभ्यता के मापदंड के रूप में रेलगाड़ी, मोटर व हवाई जहाज जैसे आधुनिक साधनों का उल्लेख है, जो आधुनिकता और भौतिक प्रगति को जोड़ता है।
प्राचीन काल में मनुष्य की असभ्यता की स्थिति — पेड़ की छाया, कंद-मूल भक्षण — का वर्णन सभ्यता के विकास-क्रम को स्पष्ट करने हेतु किया गया है।
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Frequently Asked Questions
गद्यांश में सभ्यता को कैसे परिभाषित किया गया है?
सभ्यता को मनुष्य की बाहरी/भौतिक उन्नति के रूप में परिभाषित किया गया है, जो घर बनाने, खेती करने, कपड़ा बुनने से लेकर रेलगाड़ी-मोटर-हवाई जहाज तक फैली है।
क्या सभ्यता और संस्कृति एक ही अवधारणा हैं?
नहीं, दोनों अलग हैं — सभ्यता भौतिक/बाहरी विकास है जबकि संस्कृति आंतरिक/सूक्ष्म गुण है, जैसे कला व रुचि का विकास।