आपकी पाठ्यपुस्तक की किस कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? उस कविता में वर्णित प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन कीजिए।
आपकी पाठ्यपुस्तक की किस कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? उस कविता में वर्णित प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन कीजिए।
कविता: 'पर्वत प्रदेश में पावस' (कवि: सुमित्रानंदन पंत)।
कोमल रूप का वर्णन: झरने दूध के समान सफेद फेन उगलते हुए बहते हैं; शांत झील का जल दर्पण के समान स्वच्छ प्रतीत होता है; बादल मानो झुककर पर्वत-शिखरों को चूम रहे हों; और थके-अलसाए बादल शिखरों पर विश्राम करते दिखाई देते हैं — यह पूरा दृश्य शांत, सौम्य और मनोरम है।
Marking Scheme
- 10.5 अंक: सही कविता व कवि का नाम — पर्वत प्रदेश में पावस, सुमित्रानंदन पंत।
- 21.5 अंक: कोमल रूप का वर्णन — झरना, झील का दर्पण-सा जल, बादलों का पर्वत को चूमना आदि दो-तीन बिंदु।
Hint
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के प्रथम भाग में वर्णित शांत दृश्यों (झरना, झील, बादल) पर केंद्रित रहें, रौद्र रूप न लिखें।
Quick Oral Answer
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में सुमित्रानंदन पंत ने झरनों, झील और बादलों के माध्यम से प्रकृति का कोमल, शांत रूप दर्शाया है।
Analysis & Explanation
'पर्वत प्रदेश में पावस' छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की कविता है, जिसमें वर्षा ऋतु में हिमालय क्षेत्र के दो विरोधाभासी रूपों — कोमल और रौद्र — का चित्रण है।
कविता का कोमल रूप
- झरने दूध जैसे सफेद फेन के साथ बहते हैं।
- झील का जल दर्पण-सा स्वच्छ है, तालाब में मेढक-झींगुर की आवाज़ें सुनाई देती हैं।
- बादल पर्वत को स्नेहपूर्वक चूमते और विश्राम करते प्रतीत होते हैं।
- (दूसरे भाग में वर्षा तीव्र होने पर यही प्रकृति रौद्र रूप धारण कर लेती है — बादल फटते हैं, नदियाँ उफनती हैं।)
परीक्षा में सावधानी
- प्रश्न में केवल 'कोमल रूप' पूछा गया है, अतः रौद्र रूप का वर्णन आवश्यक नहीं, इससे उत्तर भटक सकता है।
काव्य-सौंदर्य व प्रासंगिकता
- कवि की भाषा में मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग है — पर्वत को हृदय वाला और बादलों को अलसाया हुआ बताना छायावादी शैली की विशेषता है।
- यह कविता आज भी पर्यावरण-प्रेम और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जगाने के लिए प्रासंगिक है।
Common Mistakes
- 1कविता का नाम गलत लिखना या 'मनुष्यता'/'तोप' जैसी अन्य कविता बता देना।
- 2कोमल रूप के बजाय वर्षा के रौद्र/भयानक रूप का वर्णन कर देना, जो प्रश्न में नहीं पूछा गया।
Interesting Facts
सुमित्रानंदन पंत को छायावाद के चार स्तंभ कवियों (जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत) में गिना जाता है।
पंत को उनकी काव्य-कृति 'चिदंबरा' के लिए 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
यह कविता उत्तराखंड के कौसानी क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य से प्रेरित मानी जाती है, जहाँ कवि का जन्म हुआ था।
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Frequently Asked Questions
पर्वत प्रदेश में पावस कविता के कवि कौन हैं?
सुमित्रानंदन पंत, जो छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं।
इस कविता में कौन-सा अलंकार प्रमुखता से प्रयुक्त हुआ है?
मानवीकरण अलंकार, जिसमें प्रकृति के तत्वों (पर्वत, बादल) को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दर्शाया गया है।