Question 533 marksShort AnswerSection ग

'हरिहर काका' कहानी के माध्यम से लेखक ने पारिवारिक जीवन में बढ़ती स्वार्थपरता को उजागर किया है। सिद्ध कीजिए।

अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
हरिहर काका — पारिवारिक स्वार्थपरता

Official answer

पारिवारिक उपेक्षा: निःसंतान हरिहर काका को चार भाइयों के भरे-पूरे परिवार में रहते हुए भी वास्तविक स्नेह नहीं मिलता, क्योंकि सबकी रुचि केवल उनकी पुश्तैनी जमीन में है।

दोहरा स्वार्थ: जब मंदिर का महंत काका को जमीन अपने नाम लिखवाने के लिए बहलाता है, तो भाई-भतीजे भय से स्वयं जमीन हड़पने के लिए दबाव डालने लगते हैं।

हिंसा तक पहुँचना: मना करने पर भाई काका को बंधक बनाकर जबरन अंगूठे का निशान लेने का प्रयास करते हैं और शारीरिक प्रताड़ना तक देते हैं।

निष्कर्ष: इस प्रकार लेखक दिखाता है कि आधुनिक पारिवारिक संबंध स्नेह पर नहीं, संपत्ति-केंद्रित स्वार्थ पर आधारित होते जा रहे हैं।

Answer keywords:हरिहर काकामिथिलेश्वरस्वार्थपरतापारिवारिक संबंधजमीन-जायदादमहंत

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: हरिहर काका की स्थिति — निःसंतान, भरे-पूरे परिवार में भी उपेक्षित।
  2. 2.1 अंक: भाइयों तथा महंत दोनों का जमीन के प्रति लालच व दिखावटी स्नेह।
  3. 3.1 अंक: बंधक बनाकर अंगूठे का निशान लेने की घटना व निष्कर्ष — संपत्ति-केंद्रित स्वार्थपरता।

Hint

जमीन को केंद्र बनाकर बताएं कि कैसे भाइयों का स्नेह केवल संपत्ति पर आधारित था और जमीन के लिए उन्होंने बल-प्रयोग तक किया।

Quick oral answer

हरिहर काका की कहानी में भाइयों का स्नेह जमीन पर आधारित था; जमीन को लेकर उन्होंने काका को बंधक बनाकर बल-प्रयोग तक किया, जो पारिवारिक स्वार्थपरता को स्पष्ट करता है।

Common mistakes

  1. 1.केवल महंत के छल की बात करना, परिवार की स्वार्थपरता को नज़रअंदाज़ कर देना।
  2. 2.बंधक बनाने की घटना का उल्लेख न करना, जो स्वार्थपरता का सबसे प्रबल प्रमाण है।

Analysis and explanation

मिथिलेश्वर की कहानी 'हरिहर काका' पारिवारिक संबंधों के विघटन और संपत्ति-केंद्रित स्वार्थपरता का मार्मिक चित्रण करती है।


कथानक व स्वार्थपरता

  • हरिहर काका निःसंतान हैं; उनकी जमीन को लेकर दो पक्ष — भाई-भतीजे और मंदिर का महंत — दोनों उन्हें अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करते हैं, परंतु दोनों का उद्देश्य प्रेम नहीं, संपत्ति हड़पना है।
  • जब तक काका के पास भूमि थी, परिवार उन्हें महत्व देता था; जैसे ही महंत जमीन हड़पने का खतरा बना, भाइयों ने बल-प्रयोग तक कर डाला।
  • यह दिखाता है कि रक्त-संबंध भी संपत्ति के लालच में मानवीयता खो सकते हैं; लेखक पारिवारिक स्वार्थपरता के साथ धार्मिक संस्थाओं की स्वार्थलिप्तता पर भी व्यंग्य करते हैं।

परीक्षा में सावधानी

  • केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, यह विश्लेषण भी करना चाहिए कि स्वार्थपरता किस प्रकार पारिवारिक मूल्यों के क्षरण को दर्शाती है।

वास्तविक जीवन में

  • वृद्ध और निःसंतान व्यक्तियों के प्रति संपत्ति-लोलुप व्यवहार वर्तमान समाज में भी देखा जाता है, जो पारिवारिक मूल्यों के क्षरण का प्रमाण है।

Interesting facts

'हरिहर काका' कहानी ग्रामीण भारत में भूमि-विवाद और वृद्धावस्था में उपेक्षा की सामाजिक समस्या पर आधारित है।

लेखक मिथिलेश्वर बिहार के ग्रामीण जीवन के यथार्थवादी चित्रण के लिए जाने जाते हैं।

कहानी में महंत और परिवार दोनों पक्षों की तुलना करके लेखक यह दिखाते हैं कि धार्मिक और पारिवारिक दोनों संस्थाएँ स्वार्थ से अछूती नहीं हैं।

Question details

Q53 of 66 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course B
Year
2026
Section
Section ग
Marks
3
Type
Short Answer
Chapter
अपठित गद्यांश (गद्य बोध)
Topic
हरिहर काका — पारिवारिक स्वार्थपरता
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
संचयन भाग-2, गद्य खंड: हरिहर काका (मिथिलेश्वर) — पारिवारिक संबंधों में स्वार्थ
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

हरिहर काका कहानी के लेखक कौन हैं?

मिथिलेश्वर।

हरिहर काका को किन दो पक्षों से खतरा था?

अपने भाई-भतीजों तथा मंदिर के महंत, दोनों से — दोनों उनकी जमीन हड़पना चाहते थे।