Q44
1 markMCQSection खंड ग

'ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।' पंक्ति के द्वारा क्या स्पष्ट होता है?

यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
सूरदास के पद — भ्रमरगीत

Options

()श्रीकृष्ण का मन प्रेम से अछूता रहा।
()उद्धव का मन प्रेम से अछूता रहा।
()गोपियाँ प्रेम रूपी रस से अछूती रहीं।
()तेल से युक्त मटकी पर जल का प्रभाव नहीं होता।
Official Answer

सही विकल्प (ख) — उद्धव का मन प्रेम से अछूता (निर्लिप्त) रहा, यह इस उपमा का भावगत आशय है।

उद्धवतेल की गागरनिर्लिप्तताअछूता मनव्यंग्य

Marking Scheme

  • 11 अंक: सही विकल्प (ख) के चयन हेतु।

Hint

याद रखें कि यह संपूर्ण पद उद्धव को संबोधित है, न कि कृष्ण या गोपियों को।

Quick Oral Answer

इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि उद्धव का मन कृष्ण-प्रेम से पूर्णतः अछूता और निर्लिप्त रहा, ठीक जैसे तेल भरे घड़े पर पानी की बूँद नहीं ठहरती।

Analysis & Explanation

यह प्रश्न जल में डूबी तेल की गागर वाली उपमा का सही आशय पहचानने पर आधारित है।


संकल्पना

  • पूरा पद उद्धव को संबोधित है ('ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी'); तेल-घट की उपमा उद्धव की निर्लिप्तता को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु

  • जैसे तेल-घट पर जल की बूँद नहीं ठहरती, वैसे ही कृष्ण के निकट रहकर भी उद्धव का मन प्रेम-भावना से अछूता रहा।

परीक्षा में सावधानी

  • यह पंक्ति कृष्ण के लिए नहीं (विकल्प क गलत) और न गोपियों के लिए है (विकल्प ग गलत, क्योंकि वे तो प्रेम में डूबी हैं) — केवल उद्धव की निर्लिप्तता का प्रतीकात्मक अर्थ ही सही उत्तर है, शाब्दिक अर्थ (विकल्प घ) नहीं।

Common Mistakes

  1. 1पंक्ति को शाब्दिक अर्थ (विकल्प घ) में समझ लेना और भावार्थ न पकड़ पाना।
  2. 2उपमा को गोपियों या कृष्ण से जोड़ देना जबकि यह उद्धव के लिए प्रयुक्त है।

Interesting Facts

यह उपमा (तेल-घट) लोक-जीवन से ली गई है — सूरदास की काव्य-शैली की विशेषता यही है कि वे जटिल भावों को अत्यंत सरल, दैनिक जीवन की उपमाओं से व्यक्त करते हैं।

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Frequently Asked Questions

यह पंक्ति किसके लिए कही गई है?

यह पंक्ति उद्धव के लिए कही गई है, यह दर्शाने हेतु कि कृष्ण के निकट रहकर भी उनका मन प्रेम से अछूता रहा।