Question 461 markMCQSection खंड ग

प्रस्तुत पद के आधार पर सूरदास के काव्य के बारे में कहा जा सकता है। उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

I. सहज उपमाओं द्वारा गूढ़ भाव व्यक्त किए गए हैं।

II. उनके काव्य में केवल दार्शनिक चिंतन है।

III. उनका काव्य बहुत अधिक अलंकृत और सजावटी है।

IV. योग साधना से अधिक कृष्ण-प्रेम को महत्त्व दिया गया है।

यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
सूरदास के काव्य की विशेषताएँ

Options

(क)I और II सही हैं।
(ख)III और IV सही हैं।
(ग)II और III सही हैं।
(घ)I और IV सही हैं।

Official answer

सही विकल्प (घ) — कथन I और IV दोनों सही हैं।

Answer keywords:सहज उपमासगुण भक्तियोग-निषेधकृष्ण-प्रेमसूरदास काव्य-शैली

Marking scheme

  1. 1.1 अंक: सही विकल्प (घ) के चयन हेतु।

Hint

याद रखें: सूरदास प्रेम-भक्ति (सगुण) के कवि हैं, ज्ञान/योग (निर्गुण) के नहीं; उनकी भाषा सरल है, अलंकृत नहीं।

Quick oral answer

सूरदास सहज, लोक-प्रचलित उपमाओं से गूढ़ भाव व्यक्त करते हैं और योग-साधना की तुलना में कृष्ण-प्रेम को अधिक महत्त्व देते हैं।

Common mistakes

  1. 1.सूरदास के काव्य को 'दार्शनिक चिंतन-प्रधान' मान लेना, जबकि वह भाव-प्रधान भक्ति-काव्य है।
  2. 2.सरल उपमाओं को 'अलंकृत-सजावटी शैली' समझ लेना।

Analysis and explanation

यह प्रश्न सूरदास के काव्य-वैशिष्ट्य के बारे में सही कथनों का चयन माँगता है।


संकल्पना

  • पद में सहज लोक-उपमाओं (कमल-पत्र, तेल-घट, गुड़-चींटी) द्वारा गूढ़ भाव व्यक्त हुए हैं और योग-साधना की तुलना में कृष्ण-प्रेम को श्रेष्ठ बताया गया है।

मुख्य बिंदु

  • कथन I सत्य — सहज उपमाओं से गूढ़ भाव।
  • कथन IV सत्य — योग-साधना से अधिक प्रेम-भक्ति को महत्त्व।

परीक्षा में सावधानी

  • कथन II (केवल दार्शनिक चिंतन) और III (अत्यधिक अलंकृत काव्य) दोनों गलत हैं — सूरदास का काव्य भाव-प्रधान व सरल भाषा-शैली में रचित है, दार्शनिक-प्रधान या सजावटी नहीं।

Interesting facts

भक्ति-काल में सूरदास सगुण भक्ति-धारा (कृष्ण-भक्ति शाखा) के प्रमुख कवि माने जाते हैं, जबकि कबीर आदि निर्गुण धारा के प्रतिनिधि कवि हैं — इसी वैचारिक टकराव की झलक भ्रमरगीत में मिलती है।

Question details

Q46 of 64 questions

Board
CBSE
Class
Class 10
Subject
Hindi Course A
Year
2026
Section
Section खंड ग
Marks
1
Type
MCQ
Chapter
यह दंतुरित मुस्कान — नागार्जुन (काव्यखंड, क्षितिज भाग-2)
Topic
सूरदास के काव्य की विशेषताएँ
Bloom's level
analyze
Syllabus topic
काव्य खंड: 'पद' (सूरदास) — काव्य-शैली एवं भाव-सामग्री का मूल्यांकन
Author
CBSE
Reviewed by
Padhantu Academic Team

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Frequently asked questions

सूरदास का काव्य किस भक्ति-धारा से संबंधित है?

सूरदास सगुण भक्ति-धारा की कृष्ण-भक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं, जो निर्गुण/योग-मार्ग के बजाय प्रेम-भक्ति को श्रेष्ठ मानते हैं।